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उत्तर प्रदेश के हर जिले में होगी एक खास दुकान, नई आबकारी नीति में किसानों की आय बढ़ाने की पहल

लखनऊ। नई आबकारी नीति में सरकार ने फल उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने की पहल की है। इसके लिए वाइन निर्माता कंपनियां जिले में एक अलग दुकान खोलेंगी, जहां किसानों के फलों से बनी वाइन की बिक्री होगी। सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में अंग्रेजी-देशी शराब व बीयर के साथ-साथ वाइन की बिक्री में भी बढ़ोतरी हो।

आबकारी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल का कहना है कि वाइन का उत्पादन बढ़ने से प्रदेश के फल उत्पादक किसानों का भी लाभ होगा। वाइन कंपनियां किसानों से अधिक मात्रा में फलों की खरीद करेंगी।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को लोकभवन में बताया कि आबकारी नीति में सबसे बड़ा बदलाव ई-लाटरी को लेकर किया गया है। बीते छह वर्षों से लाइसेंसों का नवीनीकरण किया जाता था, लेकिन अब ई-लाटरी से दुकानों का आवंटन होगा।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में लाइसेंस नवीनीकरण का विकल्प दिया जाएगा। चालू वित्तीय वर्ष में 58,310 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा गया था, नए वित्तीय वर्ष में इसे बढ़ाकर 60,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

पहली अप्रैल से प्रदेश में 60 और 90 एमएल (मिली लीटर) के कांच व सिरोंग पैक में भी विदेशी मदिरा उपलब्ध होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी मदिरा की सामान्य श्रेणी में 90 एमएल व प्रीमियम श्रेणी में 60 व 90 एमएल के पैक की बिक्री की सुविधा दी जाएगी।

वहीं, शराब की दुकानें खोलने व बंद करने के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछले वर्ष की तरह ही सुबह दस से रात दस बजे तक ही शराब की दुकानें खोली जाएंगी।

मंडल स्तर पर वाइन की दुकानें खोलने के लिए 50,000 व जिलों में 30,000 रुपये का शुल्क देकर लाइसेंस लेना होगा। वित्त मंत्री ने पत्रकारों को बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में स्वीकृत किए गए 11 प्रस्तावों की जानकारी दी।

आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव वीना कुमारी ने बताया कि किसी कार्यक्रम स्थल पर यदि अन्य प्रदेशों के लिए निर्मित शराब को एकत्र किया जाता है और परोसा जाता है तो कार्यक्रम का आयोजन कराने वाले संबंधित व्यक्तियों पर एक लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाने की व्यवस्था की गई है। पहले यह व्यवस्था नहीं थी।

शराब विक्रेता वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने नई नीति का स्वागत किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एसपी सिंह ने कहा कि कंपोजिट दुकानें खोलने के लिए ज्यादा जगह चाहिए होगी। इसके लिए संबंधित नगरीय निकायों के जरिए दुकानें आवंटित करने की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इससे सरकार और शराब विक्रेता दोनों को लाभ होगा।

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