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CHC चिनहट में हजारो जिन्दगी इंटर्न के सहारे

लखनऊ का चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) आज चर्चा का विषय बना हुआ है। यह अस्पताल, जो समुदाय के स्वास्थ्य की देखभाल का केंद्र होना चाहिए, अब लापरवाही और अनियमितताओं का पर्याय बन गया है। यहाँ डॉक्टर्स की गैरमौजूदगी में इंटर्न द्वारा मरीजों का इलाज कराना आम बात हो गई है। यही नहीं, अस्पताल परिसर में बुनियादी सुरक्षा और मानकों की अनदेखी भी की जा रही है। इसका स्टिंग ऑपरेशन का विडियो साक्ष्य निश्चय टाइम्स के पास मौजूद है .

रात के अंधेरे में इंटर्न के भरोसे इलाज

चिनहट CHC में रात्रि की ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर्स अक्सर अपने रूम पर रहते हैं, और मरीजों का इलाज इंटर्न के हवाले कर दिया जाता है। इस लापरवाही से मरीजों की जान को बड़ा खतरा है। एक मरीज के परिजन ने बताया, “रात के समय डॉक्टर की बजाय इंटर्न ने हमारे मरीज का इलाज किया, लेकिन उनकी हालत और बिगड़ गई।”

यह लापरवाही स्वास्थ्य मंत्री एवं उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के निर्देशों को सीधे-सीधे चुनौती देती नजर आती है। डॉक्टर्स अपनी सरकारी ड्यूटी छोड़कर निजी कार्यों में व्यस्त रहते हैं, जिससे सामुदायिक केंद्र की जिम्मेदारियों पर गहरा असर पड़ता है।

 

खुले तारों वाला बिजली रूम: मौत को न्योता

चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की और भी खतरनाक स्थिति तब सामने आई, जब पता चला कि ईएमओ ऑफिस के ठीक बगल में खुले तारों वाला बिजली रूम है। यहाँ मामूली चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन खामियों पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

स्थानीय निवासी रमेश यादव का कहना है, “हमें यहां इलाज करवाने से डर लगता है। यह अस्पताल बीमारी का इलाज करने की बजाय नई मुसीबतें खड़ी करता है।” इस प्रकार की व्यवस्थाएँ अस्पताल की कार्यक्षमता और मरीजों की सुरक्षा को सवालों के घेरे में डालती हैं।

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सैकड़ों जिंदगियों के साथ खिलवाड़

चिनहट CHC में मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की कमी सैकड़ों जिंदगियों को खतरे में डाल रही है। यहां उपलब्ध स्टाफ की कमी, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, और लापरवाह डॉक्टर्स के कारण इलाज केवल नाममात्र का रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो यह केंद्र गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म देगा।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय मिश्रा कहते हैं, “सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी मानकों की अनदेखी बेहद खतरनाक है। मरीजों की जान बचाने के बजाय यह व्यवस्थाएं उन्हें और जोखिम में डाल रही हैं।”

 

स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की अनदेखी

यह स्थिति स्वास्थ्य मंत्री और उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक की उस नीति के खिलाफ है, जिसमें अस्पतालों की सेवाओं में सुधार लाने की बात कही गई थी। डॉक्टर्स की इस लापरवाही और अनियमितता से सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की भी छवि खराब हो रही है।

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