
राजधानी लखनऊ में सोमवार को ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की सभी तैयारियां फेल होती दिखीं। शहर की सड़कों पर सुबह से लेकर शाम तक भयंकर जाम लगा रहा। पक्का पुल से लेकर डालीगंज पुल तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। इस दौरान लोग घंटों जाम में फंसे रहे और हालात ऐसे हो गए कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
शहर में ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए कई योजनाएं और प्लान बनाए गए थे, लेकिन मौके पर ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी कहीं नजर नहीं आए। जगह-जगह वाहन बेतरतीब खड़े रहे, जिससे जाम और बढ़ गया। यातायात पुलिस की लापरवाही से आम लोग परेशान रहे और कई जरूरी काम भी प्रभावित हुए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल कागजों पर योजनाएं बनाता है, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। जाम में फंसे मरीजों, ऑफिस जाने वालों और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस लापरवाही से सुरक्षा व्यवस्था के भी दावे झूठे साबित हुए।
लखनऊ जैसे बड़े शहर में इस तरह का हाल साफ दिखाता है कि यातायात प्रबंधन को सुधारने के लिए गंभीर कदम उठाने की सख्त जरूरत है।


