दबंग ठेकेदारों की मनमानी से ध्वस्त हुई पारदर्शिता

गोंडा-बहराइच में 300 करोड़ की परियोजनाएं रद्द
गोंडा/बहराइच। उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में निविदा प्रणाली को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। गोंडा और बहराइच जिलों की लगभग 300 करोड़ रुपये की 11 निर्माण परियोजनाएं ठेकेदारों की दबंगई के चलते रद्द कर दी गई हैं। आरोप है कि कुछ प्रभावशाली ठेकेदारों ने निविदा प्रक्रिया में खुली प्रतिस्पर्धा को बाधित किया, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता की मूल भावना पर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
यह मामला तब सामने आया जब केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक रमापति शास्त्री ने 9 जून को प्रमुख सचिव, लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर इस पूरी निविदा प्रक्रिया की शिकायत की। उनका आरोप था कि गोंडा, बलरामपुर और बहराइच में मई माह में जारी निविदाओं में कुछ दबंग ठेकेदारों द्वारा प्रतिस्पर्धियों को डराया-धमकाया गया, जिससे निष्पक्ष प्रक्रिया संभव नहीं हो सकी।
इन शिकायतों के मद्देनज़र, अनु सचिव अभिषेक गंगवार ने 12 जून को विभाग के प्रमुख अभियंता को निर्देश जारी करते हुए पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई करने को कहा। इसके बाद देवीपाटन मंडल की कुल 11 परियोजनाओं, जिनमें 52.50 करोड़ की इटियाथोक-श्रीनगर सड़क परियोजना प्रमुख है, को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया।
मुख्य अभियंता अखिलेश दिवाकर ने पुष्टि की है कि सभी 11 परियोजनाओं की निविदाएं निरस्त कर दी गई हैं और शीघ्र ही नई निविदाएं पारदर्शी तरीके से आमंत्रित की जाएंगी।
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी माह में भी देवीपाटन मंडल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि मुख्य अभियंता अवधेश शरण चौरसिया और दो अधीक्षण अभियंता – भगवान दास और लालजी, कुछ चहेते ठेकेदारों को मनमाफिक तरीके से टेंडर दे रहे थे। जांच के बाद इन सभी अधिकारियों को पद से हटा दिया गया था। दबंग ठेकेदारों के वर्चस्व और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते राज्य की महत्वपूर्ण परियोजनाएं ठप हो रही हैं, जिससे न केवल विकास बाधित हो रहा है, बल्कि जनता की उम्मीदें भी आहत हो रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि दोबारा आमंत्रित की जाने वाली निविदाएं कितनी निष्पक्षता से पूरी होती हैं।



