उत्तर प्रदेश

UP: कटेहरी विधानसभा उपचुनाव में दलितों का समर्थन बनेगा निर्णायक, BJP और सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर 20 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में अंबेडकरनगर जिले की कटेहरी सीट पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। राम मंदिर निर्माण के बाद यह अयोध्या क्षेत्र का पहला चुनाव है, जिससे इस सीट पर जीत दर्ज करना भाजपा के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। वहीं, सपा भी अपनी इस सीट को बचाने के लिए जोर-शोर से लगी हुई है, जो पिछले दो चुनावों से उनके खाते में रही है।

जातीय समीकरण से तय होगी जीत की राह

कटेहरी विधानसभा क्षेत्र में जातिगत समीकरण इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। दलित और पिछड़े वर्ग के मतदाता यहां निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं। भाजपा, सपा, और बसपा तीनों ने पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार उतारे हैं और दलितों का समर्थन पाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने बसपा के पूर्व विधायक और मंत्री धर्मराज निषाद को टिकट दिया है, जबकि सपा ने सांसद लालजी वर्मा की पत्नी शोभावती वर्मा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, बसपा ने अमित वर्मा को मैदान में उतारा है, जिससे वर्मा वोट के बंटवारे की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

भाजपा के लिए चुनौती, स्थानीय स्तर पर असंतोष

कटेहरी विधानसभा में भाजपा को 1992 के बाद से कोई जीत नहीं मिली है। इस बार पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी है, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दो बार चुनावी दौरा कर चुके हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर असंतोष और भ्रष्टाचार के मुद्दे भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। महरूआ और किशुनीपुर जैसे क्षेत्रों के लोग स्थानीय नेताओं की भूमिका से नाराज हैं, जिससे पार्टी का कोर वोट बैंक प्रभावित हो सकता है।

सपा पर परिवारवाद का आरोप

सपा के उम्मीदवार शोभावती वर्मा पर परिवारवाद का आरोप भी लग रहा है, क्योंकि वह सांसद लालजी वर्मा की पत्नी हैं। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस निर्णय से नाराज हैं, जिसका लाभ भाजपा उठाने की कोशिश कर रही है। इस बार ‘पीडीए’ (पिछड़े-दलित-अल्पसंख्यक) फार्मूले का असर भी बहुत प्रभावी नहीं दिख रहा है, जिससे मुकाबला और रोचक हो गया है।

मुद्दों से ज्यादा प्रत्याशियों की छवि पर ध्यान

इस उपचुनाव में विकास, रोजगार और जनसमस्याओं से अधिक प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और जातीय समीकरण पर चर्चा हो रही है। कटेहरी में मतदाता प्रत्याशियों की छवि को लेकर काफी सजग दिख रहे हैं। कई मतदाता कह रहे हैं कि वे भाजपा के जिला संगठन से असंतुष्ट हैं लेकिन योगी-मोदी के नाम पर वोट दे सकते हैं।

बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार

कटेहरी का बसपा से पुराना रिश्ता है और इसे चुनावी नतीजों के बाद भी चर्चा में बने रहने की संभावना है। सपा के शोभावती वर्मा के पति लालजी वर्मा पहले बसपा से विधायक रह चुके हैं। भाजपा प्रत्याशी धर्मराज निषाद भी बसपा के मंत्री रहे हैं। अमित वर्मा तो इस बार भी बसपा के प्रत्याशी हैं। इस प्रकार, बसपा और कटेहरी का संबंध अभी खत्म नहीं हुआ है।

सपा की प्रतिष्ठा दांव पर, क्या बनेगा नया समीकरण?

अंबेडकरनगर की सभी पांच विधानसभा सीटों पर 2022 में सपा ने जीत दर्ज की थी। कटेहरी सीट सांसद चुने गए लालजी वर्मा के इस्तीफे के बाद खाली हुई, और अब उनकी पत्नी इसे बरकरार रखने के लिए चुनाव लड़ रही हैं। ऐसे में, भाजपा की ओर से इस सीट को जीतना जहां राम मंदिर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का मुद्दा है, वहीं सपा के लिए अपनी प्रभावी पकड़ को बरकरार रखना प्रतिष्ठा का प्रश्न है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जातीय समीकरण और दलित वोटों के समर्थन से कौन सा प्रत्याशी कटेहरी में बाजी मारता है।

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