उत्तर प्रदेश विधानसभा के सत्र में मंगलवार को संभल हिंसा को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जमकर बहस और हंगामा हुआ। समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायकों ने इस मुद्दे को सदन में उठाने की कोशिश की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना द्वारा चर्चा की अनुमति न मिलने पर विपक्ष ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
सपा विधायकों का विरोध प्रदर्शन
सपा के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। वे संभल हिंसा के मामले में सरकार की आलोचना कर रहे थे और विधानसभा के अंदर चर्चा की मांग कर रहे थे। सदन में प्रवेश करते हुए सपा के सदस्य साइकिल से पहुंचे, जो उनके प्रतीक का हिस्सा है।
हंगामे की शुरुआत कैसे हुई?
सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने नियम 311 के तहत संभल और बहराइच हिंसा पर चर्चा की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह मामला नियम 311 के अंतर्गत नहीं आता। उन्होंने विपक्ष से स्पष्ट किया कि यदि यह मामला 311 के अंतर्गत नहीं आता है, तो इसे नियम 356 के तहत भी नहीं सुना जा सकता। इस फैसले से नाराज सपा विधायकों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।
सरकार का जवाब
संभल हिंसा पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए योगी सरकार के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा, “विपक्ष के पास नारेबाजी के अलावा कुछ नहीं है। उनके पास न कोई रचनात्मक विचार है और न ही कोई ठोस कार्य। सरकार पूरी तरह से तैयार है और जिम्मेदारी के साथ सदन में जवाब देगी।”
विधानसभा अध्यक्ष का आह्वान
हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सभी दलों के नेताओं से शांतिपूर्ण और सकारात्मक चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा, “संसदीय व्यवस्था में संवाद और सकारात्मक बहस के माध्यम से लोकतंत्र मजबूत होता है। कृपया शालीनता और संसदीय मर्यादा बनाए रखें।”
सदन की कार्यवाही स्थगित
भारी हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दिया गया।
संभल हिंसा पर बहस की मांग क्यों?
संभल में हाल ही में हुई हिंसा ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दल इस मामले में सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और घटना पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। यूपी विधानसभा का यह सत्र सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का गवाह बना। जहां सरकार अपने फैसलों का बचाव करती दिखी, वहीं विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और हिंसा के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर जोरदार विरोध किया।
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