उत्तर प्रदेश के बाहर राजनीतिक पांव पसारने की कोशिश में जुटे समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव को जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2024 में बड़ा झटका लगा है। सपा ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन रुझानों में पार्टी को न सिर्फ कोई सीट मिलती नजर नहीं आ रही है, बल्कि वोट प्रतिशत के मामले में भी सपा को तगड़ा नुकसान हुआ है। पार्टी को महज 0.13 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो कि NOTA से भी कम हैं।
1300 किलोमीटर दूर मैदान में उतरे अखिलेश
उत्तर प्रदेश में मजबूत पकड़ रखने वाली समाजवादी पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर चुनाव एक बड़ा प्रयोग था। अखिलेश यादव ने इस चुनाव में अपनी पार्टी को राज्य की 20 सीटों पर उतारा, जिनमें से 5 सीटें जम्मू की और 15 सीटें कश्मीर की थीं। सपा का यह कदम यूपी के बाहर पार्टी का विस्तार करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था, लेकिन शुरुआती नतीजों में सपा को कहीं भी सफलता मिलती नहीं दिख रही है।
NOTA से भी कम वोट
सपा को अब तक के रुझानों में केवल 0.13 प्रतिशत वोट मिले हैं, जो कि जम्मू-कश्मीर में “नोटा” (None of the Above) को मिले 1.44 प्रतिशत वोटों से भी कम हैं। यह नतीजा सपा के लिए बड़ा झटका है, खासकर तब जब पार्टी ने हाल के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में शानदार प्रदर्शन किया था।
किस सीटों पर सपा ने आजमाया था भाग्य
अखिलेश यादव ने बारामूला, बांदीपोरा, कुपवाड़ा, गुलमर्ग, त्रेहगाम, लोलाब, विजयपुर, नागरोटा और बड़गाम जैसी प्रमुख सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद सपा को नतीजों में कोई सफलता नहीं मिली।
जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-एनसी गठबंधन की बढ़त
जम्मू-कश्मीर चुनाव के रुझानों में कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन को बड़ी सफलता मिलती नजर आ रही है। गठबंधन 51 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि बीजेपी को 26 सीटें मिलती दिख रही हैं। अन्य दलों के खाते में 13 सीटें जाने का अनुमान है। इस बार कांग्रेस ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा, जबकि पीडीपी, बीजेपी और अन्य पार्टियों ने अकेले चुनाव लड़ा था।
सपा के लिए चुनौती
जम्मू-कश्मीर में सपा का प्रदर्शन अखिलेश यादव की राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी का प्रभाव बढ़ाने की योजना पर सवाल खड़े कर रहा है। जम्मू-कश्मीर में NOTA से भी कम वोट मिलना, सपा के लिए एक आत्मनिरीक्षण का मौका हो सकता है।अखिलेश यादव ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपनी पार्टी को पैर जमाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआती नतीजों से साफ है कि सपा को यहां कोई खास सफलता नहीं मिली। यह नतीजे सपा के राष्ट्रीय विस्तार की संभावनाओं पर भी असर डाल सकते हैं।