संसद का बजट सत्र आज (31 जनवरी) से शुरू हो गया है, जिसमें बजट के साथ कई लंबित विधेयकों पर चर्चा होगी। इनमें ‘वक्फ संशोधन बिल’ भी शामिल है, जिसे केंद्र सरकार हर हाल में इसी सत्र में पारित कराना चाहती है। इस बिल पर चर्चा के लिए गठित जॉइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (JPC) ने एक दिन पहले ही अपनी रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को सौंप दी है।
विपक्षी दलों ने इस विधेयक के खिलाफ कई आपत्तियां दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें न तो JPC में सुना गया और न ही संसद में सुनवाई की संभावना दिख रही है। इस स्थिति में जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने नया कदम उठाते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से इस बिल को रोकने का अनुरोध किया है।
नीतीश और नायडू को लिखा खत
महबूबा मुफ्ती ने इन दोनों नेताओं को पत्र लिखकर वक्फ संशोधन बिल को मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को छीनने का प्रयास है। मुफ्ती ने अपने इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर भी साझा किया और नीतीश-नायडू को टैग करते हुए इस बिल के खिलाफ समर्थन देने की अपील की।
उन्होंने लिखा, “प्रस्तावित वक्फ संशोधन विधेयक न केवल मुसलमानों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, बल्कि वक्फ अधिनियम की स्वायत्तता को कमजोर कर संपत्तियों को छीनने का भी प्रयास करता है।”
नीतीश और नायडू को ही क्यों लिखा गया खत?
नीतीश कुमार की जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी इस समय केंद्र सरकार का हिस्सा हैं। एनडीए सरकार में बीजेपी के बाद यही दो सबसे बड़ी सहयोगी पार्टियां हैं, जिनकी कुल 28 सीटें हैं। चूंकि बीजेपी अकेले पूर्ण बहुमत नहीं ला पाई थी, इसलिए इन दोनों दलों के समर्थन से सरकार बनी।
नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू की पार्टियां मुस्लिम वोटर्स के बीच भी पकड़ रखती हैं और उनकी छवि सेक्युलर मानी जाती है। ऐसे में अगर ये दोनों नेता चाहें तो इस बिल को पारित होने से रोक सकते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि महबूबा मुफ्ती की इस अपील पर इन दोनों नेताओं की क्या प्रतिक्रिया आती है।
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