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वायनाड भूस्खलन: केरल के वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार पर लगाया गंभीर आरोप

केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने वायनाड में भूस्खलन के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा किए गए राहत और बचाव कार्यों के लिए भुगतान मांगने पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे राज्य की आपदा से जूझ रही जनता के “घावों पर मिर्च छिड़कने” जैसा बताया।
क्या है मामला?
वित्त मंत्री ने खुलासा किया कि केंद्र सरकार ने वायनाड भूस्खलन और 2018 की बाढ़ के दौरान भारतीय वायुसेना के बचाव कार्यों के लिए केरल से 113 करोड़ रुपये का भुगतान मांगा है। इसमें 2018 की बाढ़ के दौरान बचाव कार्यों के 100 करोड़ रुपये और वायनाड भूस्खलन के लिए 13 करोड़ रुपये शामिल हैं।
बालगोपाल ने कहा, “यह कदम आपदा में पहले से ही परेशान राज्य के लोगों का मजाक उड़ाने जैसा है। भाजपा शासित केंद्र सरकार ने आपदा राहत के लिए वादा किया हुआ धन अभी तक नहीं दिया, और अब यह नया विधेयक भेजा गया है।”
मुख्य सचिव को पत्र और विवाद
वित्त मंत्री की यह टिप्पणी 22 अक्टूबर, 2024 को लिखे गए एक पत्र पर आधारित थी, जिसका शीर्षक था ‘बकाया एयरलिफ्ट शुल्क का निपटान’। यह पत्र 2 नवंबर को केरल के तत्कालीन मुख्य सचिव वी. वेणु के कार्यालय को मिला।
भाजपा का पलटवार
केंद्र सरकार और भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर केरल सरकार को घेरा। केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि “राहत कार्यों के लिए भारतीय वायुसेना को भुगतान सभी राज्यों द्वारा किया जाता है। लेकिन, सीएम विजयन की सरकार के पास 2 लाख करोड़ रुपये का वार्षिक बजट होने के बावजूद विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है?”
भूस्खलन की विनाशकारी त्रासदी
30 जुलाई को वायनाड में हुए भूस्खलन में तीन गांवों – पुंचरीमट्टम, चूरलमाला, और मुंदक्कई – के बड़े हिस्से तबाह हो गए थे। इस आपदा में 300 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।
वित्त मंत्री ने भाजपा नेताओं पर भी साधा निशाना
बालगोपाल ने भाजपा नेताओं, विशेष रूप से केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी और पूर्व मंत्री वी. मुरलीधरन की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “केरल से जुड़े मुद्दों पर भाजपा नेताओं का यह रवैया राज्य की जनता का अपमान है।”
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि आपदा राहत में राज्य और केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। ऐसे समय में राजनीतिक बयानबाजी से जनता का भरोसा टूटता है।
वायनाड की त्रासदी ने न केवल राज्य के लिए गहरे घाव छोड़े हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आपदा राहत को लेकर खींचतान को भी उजागर किया है। अब देखना होगा कि इस विवाद का समाधान कैसे निकाला जाएगा।

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