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विश्व फेफड़ा दिवस: फेफड़ों में कैंसर से हर साल लाखों मौतें, धूम्रपान को बताया गया सबसे बड़ा खतरा

नई दिल्ली: हर साल 25 सितंबर को विश्व फेफड़ा दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इससे संबंधित बीमारियों की रोकथाम को बढ़ावा देना है। हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि फेफड़ों में कैंसर से हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।
फेफड़ों में कैंसर: एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या
ग्लोबोकैन 2022 के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर से लगभग 1.8 मिलियन (18 लाख) मौतें हुईं। यह कैंसर से होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है और इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, खासकर युवा आबादी में। भारत में भी फेफड़ों के कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी गई है, जो सभी कैंसर का 5.9% और कैंसर से संबंधित मौतों का 8.1% है।
फेफड़ों में कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि के कारण कैंसर होता है, जिसमें डीएनए में परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कैंसर कोशिकाएं स्वस्थ ऊतकों को प्रभावित कर सकती हैं और समय के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकती हैं।

धूम्रपान: कैंसर का प्रमुख कारण
धूम्रपान, फेफड़ों के कैंसर के लिए सबसे बड़ा जोखिम कारक है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली 80% मौतें धूम्रपान से संबंधित हैं। धूम्रपान न करने वाले लोग भी सेकेंडहैंड स्मोकिंग के संपर्क में आकर इस खतरे का सामना कर सकते हैं। इसके अलावा, वायु प्रदूषण और रासायनिक पदार्थों का अधिक संपर्क भी फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
लक्षणों की पहचान और बचाव के उपाय
फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती चरणों में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें लंबे समय तक खांसी, खांसी के साथ खून आना, सीने में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और वजन में कमी शामिल हैं।
फेफड़ों के कैंसर से बचाव के लिए धूम्रपान से दूर रहना, रासायनिक और प्रदूषण वाले क्षेत्रों से बचना और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार भी कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में कैंसर के लक्षण दिखते हैं, तो समय पर चिकित्सा जांच कराना जरूरी है। समय पर इलाज से जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।




