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₹2000 नोट की वापसी: RBI के फैसले पर उठे सवाल, आम जनता फिर उलझन में

नीतियों का यू-टर्न? 7 साल में ही खत्म हुआ ₹2000 नोट का दौर

  1. कभी ‘बड़ी करेंसी’ का समाधान बताया गया ₹2000 नोट अब सिस्टम से बाहर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी एफ हिंदी

भारतीय वित्तीय प्रणाली में एक समय सबसे बड़ी करेंसी के रूप में पेश किया गया ₹2000 का नोट अब धीरे-धीरे इतिहास बनता जा रहा है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा इसे सर्कुलेशन से वापस लेने के फैसले ने न केवल आर्थिक नीति की निरंतरता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम नागरिकों और छोटे कारोबारियों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

₹2000 का नोट नवंबर 2016 में उस समय जारी किया गया था जब देश में ₹500 और ₹1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया था। उस समय सरकार और केंद्रीय बैंक ने इसे तेजी से नकदी उपलब्ध कराने का उपाय बताया था। लेकिन अब मात्र सात वर्षों के भीतर ही इसे सर्कुलेशन से हटाने का फैसला कई विशेषज्ञों के अनुसार नीति-निर्माण की अस्थिरता को उजागर करता है।

RBI के अनुसार, ₹2000 के लगभग 89 प्रतिशत नोट मार्च 2017 से पहले जारी किए गए थे और अब वे अपनी अनुमानित 4-5 वर्ष की जीवन

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