बिज़नेस

Reserve Bank of India के सिटिजन चार्टर पर सवाल

हजारों आवेदन अब भी लंबित, कई मामलों में तय समयसीमा का उल्लंघन

फिनटेक, विदेशी मुद्रा और नियामकीय सेवाओं में धीमी कार्यप्रणाली उजागर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी एफ हिंदी

देश की शीर्ष वित्तीय संस्था Reserve Bank of India (आरबीआई) की सिटिजन चार्टर सेवाओं को लेकर जारी ताजा आंकड़े कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बड़ी संख्या में आवेदन अब भी लंबित हैं और कई मामलों में निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया।

आरबीआई द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार फरवरी महीने की शुरुआत में ही 2,833 आवेदन लंबित थे। महीने के दौरान 20,449 नए आवेदन प्राप्त हुए, जबकि 517 मामलों में आवेदकों से अतिरिक्त जानकारी मांगी गई। इस प्रकार कुल 22,765 मामलों पर कार्रवाई होनी थी।

हालांकि आरबीआई का दावा है कि 19,570 आवेदनों का निस्तारण किया गया, लेकिन वास्तविक तस्वीर इससे कहीं अधिक जटिल है। इनमें से 32 आवेदन तय समयसीमा से परे जाकर निपटाए गए, जो यह संकेत देते हैं कि संस्थान की सेवा प्रणाली में कहीं न कहीं सुस्ती और प्रक्रियात्मक बाधाएं मौजूद हैं।

सबसे चिंताजनक स्थिति लंबित आवेदनों की है। फरवरी के अंत तक 3,195 आवेदन अब भी लंबित पड़े हैं। इनमें से 17 मामलों में समयसीमा भी पार हो चुकी है। आरबीआई ने इन मामलों में देरी का कारण बाहरी एजेंसियों से इनपुट का इंतजार और आंतरिक प्रक्रिया बताया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी देरी आम नागरिकों और संस्थाओं के लिए परेशानी का कारण बनती है।

कार्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो फिनटेक से जुड़े सभी 18 आवेदन अब तक लंबित हैं, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में धीमी प्रगति का संकेत देते हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन से जुड़े 1,045 से अधिक मामले भी लंबित श्रेणी में हैं। इसके अलावा विनियमन एवं पर्यवेक्षण से जुड़े 690 से अधिक मामलों का निपटारा भी नहीं हो सका है।

हालांकि आरबीआई ने दावा किया है कि उसकी सिटिजन चार्टर सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाती है और हाल ही में एक नई सेवा जोड़ी गई है, जबकि एक सेवा में अनुमोदन की आवश्यकता समाप्त की गई है। इसके बावजूद कुल सेवाओं की संख्या 200 ही बनी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब देश का केंद्रीय बैंक पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा देने का दावा करता है, तब हजारों लंबित आवेदन उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।

यह स्थिति बताती है कि नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अभी भी काफी सुधार की जरूरत है।

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