बार-बार बढ़ रही डेडलाइन: क्या PMAY फ्लैट्स के लिए नहीं मिल रहे खरीदार?
सरकारी योजनाएं बनाम जनता की दूरी: क्यों नहीं दिख रहा भरोसा?

205 फ्लैट अब भी खाली—योजना की जमीनी हकीकत पर उठे सवाल
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
कानपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 205 खाली फ्लैटों के आवंटन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी गई है। अब इच्छुक आवेदक 17 अप्रैल 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। लेकिन इस फैसले ने योजना की सफलता और जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राधिकरण के अनुसार, होली, रामनवमी और ईद जैसे त्योहारों के चलते आवेदन की गति धीमी रही, इसलिए डेडलाइन बढ़ाई गई। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह केवल एक औपचारिक कारण हो सकता है—असल समस्या इन फ्लैटों के प्रति कम रुचि या affordability (किफायती होने) से जुड़ी हो सकती है।
बताया गया है कि ये फ्लैट “रिफंड” के बाद खाली हुए हैं, यानी पहले आवंटन के बावजूद लोगों ने इन्हें छोड़ दिया। यह स्थिति योजना के क्रियान्वयन और गुणवत्ता पर भी सवाल उठाती है—क्या लोकेशन, सुविधाएं या कीमतें आम लोगों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही हैं?
आवेदन प्रक्रिया को HDFC Bank के माध्यम से संचालित किया जा रहा है, लेकिन बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेजी जटिलताओं को भी आम नागरिकों के लिए एक बाधा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता केवल निर्माण पर नहीं, बल्कि उनकी उपयोगिता, कनेक्टिविटी, और लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ाव पर निर्भर करती है। अगर फ्लैट बार-बार खाली रह जाते हैं, तो यह नीति निर्माण और क्रियान्वयन के बीच गैप को उजागर करता है।
कुल मिलाकर, डेडलाइन बढ़ाना तात्कालिक समाधान जरूर है, लेकिन यह संकेत भी देता है कि योजना को जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।



