यूपी मतदाता सूची पुनरीक्षण में 3 करोड़ से अधिक मतदाताओं पर सवाल, नोटिस और सुनवाई से बढ़ी चिंता
मतदाता सूची में भारी विसंगतियां! 2.22 करोड़ प्रविष्टियों में तार्किक गड़बड़ी, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने नहीं कराया मिलान, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी.एफ. हिंदी
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के दौरान सामने आए आंकड़ों ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची की सटीकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को लखनऊ स्थित लोकभवन के मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दावा एवं आपत्ति अवधि (6 जनवरी से 6 मार्च 2026) की जानकारी साझा की, जिसमें बड़ी संख्या में विसंगतियां और अपूर्ण सत्यापन के मामले सामने आए।
प्रेस वार्ता के अनुसार 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में प्रदेश में कुल 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता दर्ज किए गए। इनमें 6.88 करोड़ पुरुष, 5.67 करोड़ महिलाएं और 4,119 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं।
हालांकि सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि 1.04 करोड़ मतदाताओं ने अपना मिलान ही नहीं कराया, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं के विवरण में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में प्रशासन को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। 14 जनवरी से नोटिस जारी किए गए और 21 जनवरी से सुनवाई प्रारंभ हुई।
अब तक जारी नोटिसों में से 93.8 प्रतिशत का वितरण किया जा चुका है, जबकि 85.8 प्रतिशत मामलों में सुनवाई पूरी की जा चुकी है। प्रदेश में इन मामलों की सुनवाई के लिए 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 12,758 सहायक अधिकारी और 5,621 सुनवाई केंद्र बनाए गए हैं।
दावा और आपत्ति अवधि के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 70.69 लाख फॉर्म-6 प्राप्त हुए, जबकि नाम हटाने के लिए 2.68 लाख फॉर्म-7 और विवरण संशोधन के लिए 16.33 लाख फॉर्म-8 जमा किए गए। बड़ी संख्या में संशोधन और दावों ने भी मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासन का कहना है कि मसौदा मतदाता सूची से किसी भी नाम को बिना नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया के हटाया नहीं जा सकता। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर नोटिस, विसंगतियां और सत्यापन की कमी चुनावी तैयारियों को जटिल बना सकती हैं।
राजनीतिक दलों की भागीदारी भी इस प्रक्रिया में उल्लेखनीय रही। पुनरीक्षण के दौरान विभिन्न स्तरों पर 3,090 बैठकें आयोजित की गईं और 5.82 लाख बूथ लेवल एजेंट इस प्रक्रिया में शामिल हुए। फिर भी विपक्षी दलों की ओर से शिकायतें दर्ज कराए जाने से चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।



