स्वास्थ्य सेवाओं के दावों पर सवाल: एमओयू से क्या बदलेगी जमीनी हकीकत?:
एआई आधारित सुपर स्पेशियलिटी आईसीयू का वादा, लेकिन अस्पतालों में अब भी संसाधनों की कमी

1.4 करोड़ आबादी के लिए योजना, पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी बड़ी चुनौती
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क, डीएफ हिंदी
प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे के बीच प्रयागराज में दो सरकारी अस्पतालों और सैन्य अस्पताल के बीच एमओयू साइन किए जाने की घोषणा हुई है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री Brajesh Pathak ने इसे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण इलाज की दिशा में बड़ा कदम बताया है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल समझौता पत्रों से जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आना आसान नहीं होगा।
जानकारी के अनुसार प्रयागराज के Tej Bahadur Sapru Hospital और Motilal Nehru Divisional Hospital में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुपर स्पेशियलिटी आईसीयू स्थापित करने के लिए Cantonment General Hospital के साथ एमओयू किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इससे क्रिटिकल केयर, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी।
हालांकि जमीनी स्तर पर सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश के अधिकांश जिला अस्पतालों में आज भी पर्याप्त डॉक्टर, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी बनी हुई है। ऐसे में एआई आधारित आईसीयू और टेलीमेडिसिन जैसी उन्नत तकनीक को लागू करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से प्रयागराज मंडल की लगभग 1.4 करोड़ आबादी को लाभ मिलेगा, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए केवल दो अस्पतालों में सुविधाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा।
योजना के तहत टेलीमेडिसिन मॉडल के माध्यम से निजी अस्पतालों और विशेषज्ञों से समन्वय की बात भी कही गई है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों की मौजूदा व्यवस्था में मरीजों को बेसिक जांच और समय पर इलाज तक के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह एमओयू वास्तव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम साबित होगा या फिर यह भी सरकारी घोषणाओं की लंबी सूची में एक और जोड़ बनकर रह जाएगा।



