RBI की सख्ती: यूपी सिविल सेक्रेटेरियट को-ऑपरेटिव बैंक पर कड़े प्रतिबंध
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जमाकर्ताओं में चिंता, ₹5 लाख तक का बीमा सहारा
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डी.एफ. हिंदी
लखनऊ के प्रमुख सहकारी बैंकों में से एक The U.P. Civil Secretariat Primary Cooperative Bank Limited पर Reserve Bank of India ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कई वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं। बैंक की बिगड़ती वित्तीय स्थिति और जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, जिससे हजारों खाताधारकों में चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार 11 मार्च 2026 के कारोबार बंद होने के बाद से बैंक बिना आरबीआई की लिखित अनुमति के कोई नया लोन नहीं दे सकेगा, न ही पुराने लोन का नवीनीकरण कर सकेगा। इसके अलावा बैंक किसी भी प्रकार का नया निवेश नहीं कर सकेगा और न ही कोई नई देनदारी ले सकेगा। सबसे बड़ा झटका यह है कि बैंक को ताजा जमा स्वीकार करने और खातों से पैसे निकालने पर भी रोक लगा दी गई है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा तरलता संकट को देखते हुए जमाकर्ताओं को उनके बचत, चालू या अन्य खातों से किसी भी राशि की निकासी की अनुमति फिलहाल नहीं दी जाएगी। हालांकि कुछ सीमित परिस्थितियों में जमा राशि के बदले ऋण समायोजन की अनुमति दी गई है।
बैंक को केवल आवश्यक खर्च जैसे कर्मचारियों का वेतन, किराया और बिजली बिल जैसे अनिवार्य भुगतान करने की सीमित अनुमति दी गई है। आरबीआई ने बताया कि हाल के समय में बैंक के बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के साथ कई बार बैठक कर कार्यप्रणाली सुधारने के प्रयास किए गए, लेकिन ठोस सुधार न होने के कारण यह कठोर कदम उठाना पड़ा।
इस बीच राहत की बात यह है कि पात्र जमाकर्ताओं को Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation के माध्यम से अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि का बीमा कवर मिल सकेगा, जो DICGC अधिनियम 1961 के तहत लागू है।
हालांकि आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम बैंक का लाइसेंस रद्द करने के बराबर नहीं है। बैंक सीमित प्रतिबंधों के साथ अपनी बैंकिंग गतिविधियां जारी रख सकेगा, लेकिन इन निर्देशों की अवधि फिलहाल छह महीने तय की गई है और आगे स्थिति के अनुसार समीक्षा की जाएगी।


