उत्तर प्रदेश

यूपी में ओला-उबर पर सख्ती, अब अनिवार्य होगा पंजीकरण और लाइसेंस हेडलाइन

पांच लाख की लाइसेंस फीस और सख्त नियमों से बढ़ सकती हैं यात्रियों की किराया दरें

सरकार का दावा सुरक्षा का, लेकिन टैक्सी कारोबार पर बढ़ेगा नियामकीय दबाव

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क, डीएफ हिंदी

उत्तर प्रदेश में कैब सेवा देने वाली एग्रीगेटर कंपनियों पर सरकार ने सख्त नियम लागू करने का फैसला किया है। राज्य सरकार के नए निर्णय के तहत अब Ola Cabs और Uber जैसी कंपनियों को राज्य में संचालन से पहले अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Dayashankar Singh ने कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी दी।

सरकार का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियमों से टैक्सी सेवा क्षेत्र में नियामकीय दबाव बढ़ सकता है और इसका असर सीधे यात्रियों और ड्राइवरों पर पड़ सकता है।

नए प्रावधानों के अनुसार, बिना पंजीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट, मेडिकल टेस्ट और पुलिस वेरिफिकेशन के कोई भी ओला-उबर जैसी टैक्सी सेवा संचालित नहीं कर सकेगी। साथ ही एग्रीगेटर कंपनियों को लाइसेंस के लिए पांच लाख रुपये तक का शुल्क देना होगा। आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये रखा गया है और लाइसेंस का नवीनीकरण हर पांच वर्ष में किया जाएगा, जिसके लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा।

सरकार का तर्क है कि अब तक इन प्लेटफॉर्म पर कौन ड्राइवर वाहन चला रहा है, उसकी पूरी जानकारी प्रशासन के पास नहीं होती थी। नए नियमों के लागू होने के बाद ड्राइवर का मेडिकल परीक्षण, पुलिस सत्यापन और वाहन की फिटनेस अनिवार्य होगी।

हालांकि परिवहन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारी लाइसेंस फीस और सख्त प्रक्रियाओं के कारण छोटे ऑपरेटरों और ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई जा रही है कि कंपनियां बढ़ते नियामकीय खर्च की भरपाई किराया बढ़ाकर कर सकती हैं।

सरकार ने यह भी कहा है कि एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिसमें ड्राइवर और वाहन से जुड़ी सभी जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी। लेकिन आलोचकों का कहना है कि असली चुनौती इन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी की होगी।

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