राजनीति

“75 हजार से ज्यादा बूथ, फिर भी एक भी पुनर्मतदान नहीं—क्या जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई?”

“फॉर्म 17ए जांच में ‘सब कुछ सही’ का दावा, लेकिन पारदर्शिता पर उठे नए सवाल”

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में फॉर्म 17ए की जांच को लेकर पेश की गई रिपोर्ट भले ही “संतोषजनक” तस्वीर पेश कर रही हो, लेकिन कई स्तरों पर यह प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ रही है। आयोग का दावा है कि हजारों मतदान केंद्रों की जांच के बावजूद कहीं भी पुनर्मतदान की जरूरत नहीं पड़ी, पर विशेषज्ञों और विपक्षी हलकों में इस निष्कर्ष को लेकर संदेह गहराता दिख रहा है।

पश्चिम बंगाल के 152 विधानसभा क्षेत्रों में 44,376 मतदान केंद्रों और तमिलनाडु के 234 विधानसभा क्षेत्रों में 75,064 बूथों की जांच के बाद भी किसी भी गड़बड़ी का न मिलना कई लोगों को “अविश्वसनीय रूप से परफेक्ट” लग रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या इतनी विशाल प्रक्रिया में एक भी अनियमितता का सामने न आना वास्तव में संभव है या फिर जांच की प्रक्रिया में ही कोई खामी है।

हालांकि आयोग ने दावा किया है कि पूरी प्रक्रिया सामान्य पर्यवेक्षकों और उम्मीदवारों की मौजूदगी में हुई, लेकिन 1,000 से अधिक उम्मीदवारों की भागीदारी के बावजूद पारदर्शिता को लेकर भरोसा पूरी तरह कायम नहीं हो पाया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल औपचारिक उपस्थिति से निष्पक्षता की गारंटी नहीं मिलती।

ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को स्ट्रांग रूम में डबल लॉक और सीसीटीवी निगरानी में रखने का दावा भी किया गया है, लेकिन पहले भी इस तरह की व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को निगरानी की अनुमति देने के बावजूद, वास्तविक नियंत्रण प्रशासन के हाथ में ही बना रहता है, जिससे संदेह पूरी तरह खत्म नहीं होता।

फॉर्म 17ए की जांच और रिकॉर्ड की सीलिंग को लेकर भी कई बार यह आरोप लगे हैं कि यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से जटिल है और आम उम्मीदवारों या प्रतिनिधियों के लिए इसकी गहराई से जांच करना आसान नहीं होता। ऐसे में “कोई गड़बड़ी नहीं” का निष्कर्ष कई लोगों को जल्दबाजी में लिया गया निर्णय प्रतीत होता है।

चुनाव आयोग की मंशा भले ही पारदर्शिता बढ़ाने की हो, लेकिन जमीनी हकीकत में भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है। जब तक जांच प्रक्रिया को और अधिक खुला, स्वतंत्र और तकनीकी रूप से मजबूत नहीं बनाया जाता, तब तक इस तरह के दावे संदेह से परे नहीं हो पाएंगे।

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