हेल्थ

1.5 अरब लोगों तक सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य, ग्लोबल पोर्टफोलियो में तेज प्रगति

575 मिलियन उपलब्धि के साथ 39% समय पूरा—हेल्थ सेक्टर में बढ़ा निवेश और असर

575 मिलियन उपलब्धि के साथ 39% समय पूरा—हेल्थ सेक्टर में बढ़ा निवेश और असर

वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल का लक्ष्य वर्ष 2030 तक करीब 1.5 अरब लोगों तक गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। जुलाई 2023 से मार्च 2026 के बीच अब तक 575 मिलियन की उपलब्धि दर्ज की जा चुकी है, जो इस मिशन की ठोस प्रगति को दर्शाता है।

इस अवधि में कुल 33 महीने यानी लगभग 39.3% समय बीत चुका है, जबकि प्रगति 38% से अधिक दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि कार्यक्रम तय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। इस पोर्टफोलियो के तहत International Development Association और International Bank for Reconstruction and Development के माध्यम से 134 सक्रिय परियोजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि कुल परियोजनाओं की संख्या 208 है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा जीवन के हर चरण तक बढ़ाना, दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करना और इलाज पर आने वाले खर्च को कम करना है। स्वास्थ्य क्षेत्र न केवल लोगों के जीवन स्तर को सुधारता है, बल्कि यह रोजगार का भी एक बड़ा स्रोत है। स्वस्थ जनसंख्या अधिक उत्पादक होती है और आर्थिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाती है।

इसी कड़ी में भारत का एक महत्वपूर्ण उदाहरण Tamil Nadu Health System Reform Program है, जिसका उद्देश्य तमिलनाडु में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारना, गैर-संचारी रोगों और चोटों के प्रबंधन को मजबूत करना और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में असमानताओं को कम करना है। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के Sustainable Development Goal 3 को हासिल करने में भी योगदान दे रहा है, जिसका लक्ष्य रोकथाम योग्य मौतों को समाप्त करना है।

इस परियोजना के तहत स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने, बेहतर प्रबंधन लागू करने और सेवाओं को सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार इस पहल का प्रमुख हिस्सा है।

कुल मिलाकर, यह वैश्विक स्वास्थ्य मिशन न केवल बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है, बल्कि यह आर्थिक विकास, सामाजिक समानता और मानव संसाधन सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।

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