ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे ने एक विशेष योजना तैयार की है। इस योजना के तहत ट्रैकमित्रों की नियुक्ति और ब्लैकस्पॉट चिह्नित करना प्रमुख कदम हैं। ब्लैकस्पॉट वे स्थान हैं, जहां हादसे और पथराव की घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। रेलवे इन स्थानों का डेटा तैयार कर इन घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ब्लूप्रिंट बनाएगा।
रेलवे ने 3200 से अधिक ग्रामीणों को *ट्रैकमित्र* नियुक्त किया है, जिनका मुख्य काम पटरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पथराव करने वाले शरारती तत्वों की जानकारी देना है। उत्तर, पूर्वोत्तर और उत्तर मध्य रेलवे ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है, और ट्रैकमित्र गांवों में जागरूकता अभियान चलाने में मदद कर रहे हैं।
रेलवे का पूरा फोकस सुरक्षा पर है, जिसके लिए डेढ़ लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस बजट का एक हिस्सा ट्रेनों और पटरियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
पथराव की घटनाएं बढ़ीं, हाईस्पीड ट्रेनें भी शिकार
गोरखपुर-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस पर पांच बार पथराव हो चुका है, और हाल ही में गोमतीनगर-पटना वंदेभारत ट्रेन पर भी पथराव की घटना सामने आई है। पहले पथराव की घटनाएं त्यौहारों के आसपास ही होती थीं, लेकिन अब हाईस्पीड और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों तक को निशाना बनाया जा रहा है। यूपी में अब तक 170 से अधिक पथराव की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
रेलवे का कदम
रेलवे ब्लैकस्पॉट को चिह्नित कर इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की योजना बना रहा है। ट्रैकमित्रों की नियुक्ति से स्थानीय समुदायों की मदद से शरारती तत्वों की पहचान और घटनाओं पर अंकुश लगाना आसान होगा।
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