नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता और महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भरता केवल हमारी नीति नहीं है, बल्कि अब यह हमारा जुनून बन गया है।” प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि एक समय था, जब भारत में जटिल तकनीकों के विकास को लेकर लोगों में संदेह था। लेकिन आज भारत ने ऐसे काम किए हैं, जो देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे ले जा रहे हैं।
2014 में हुई थी ‘मन की बात’ की शुरुआत
प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम पहली बार तीन अक्तूबर 2014 को प्रसारित हुआ था। इस कार्यक्रम की खासियत है कि इसे भारत की 22 भाषाओं और 29 बोलियों में प्रसारित किया जाता है। साथ ही, इसे 11 विदेशी भाषाओं – जैसे फ्रेंच, चीनी, इंडोनेशियाई, तिब्बती, बर्मी, बलूची, अरबी, पश्तू, फारसी, दारी, और स्वाहिली – में भी प्रसारण किया जाता है।
‘मन की बात’ का व्यापक प्रसारण
‘मन की बात’ कार्यक्रम आकाशवाणी के 500 से अधिक केंद्रों के माध्यम से देश भर में लोगों तक पहुंचता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देशवासियों के साथ संवाद करते हैं और उन्हें आत्मनिर्भर भारत अभियान में भागीदारी के लिए प्रेरित करते हैं।
देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत की सफलता की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में अद्वितीय काम कर रहा है। उन्होंने देशवासियों से इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान किया, जिससे भारत को और भी सशक्त और स्वतंत्र बनाया जा सके।