चीन की अर्थव्यवस्था को खपत आधारित मॉडल की ओर मोड़ने की जरूरत: IMF
सामाजिक सुरक्षा, राजकोषीय प्रोत्साहन और प्रॉपर्टी सेक्टर समर्थन से बढ़ेगी घरेलू मांग

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | 19 फरवरी 2026
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन अब एक अहम मोड़ पर खड़ी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के विशेषज्ञों—डेनियल गार्सिया-मासिया, सोनाली जैन-चंद्रा, सिद्धार्थ कोठारी और यीझी शू—की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन को निर्यात आधारित मॉडल से आगे बढ़कर खपत (कंजम्प्शन) आधारित विकास रणनीति अपनानी होगी।
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था 5 प्रतिशत बढ़ी और 2026 में 4.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, प्रॉपर्टी सेक्टर में लंबे समय से चल रही सुस्ती और कमजोर सामाजिक सुरक्षा तंत्र ने घरेलू मांग को प्रभावित किया है। इसके चलते महंगाई पर दबाव और विकास की निर्यात पर बढ़ती निर्भरता जैसी चुनौतियां सामने आई हैं।
IMF का सुझाव है कि चीन को अधिक प्रभावी राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज लागू करना चाहिए। इसके तहत सार्वजनिक निवेश और चुनिंदा औद्योगिक सब्सिडी में कटौती कर सामाजिक क्षेत्र—जैसे स्वास्थ्य, पेंशन, बेरोजगारी भत्ता और सामाजिक सहायता—पर खर्च बढ़ाया जाए। इससे लोगों की बचत प्रवृत्ति घटेगी और खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी।
रिपोर्ट में ‘हुकौ’ (हाउसहोल्ड रजिस्ट्रेशन) प्रणाली में ढील देने पर भी जोर दिया गया है, ताकि ग्रामीण प्रवासी श्रमिकों को शहरी सामाजिक सुविधाओं का लाभ मिल सके। अनुमान है कि 20 करोड़ प्रवासियों को शहरी दर्जा देने से जीडीपी में खपत का अनुपात 0.6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
इसके अलावा, अधूरे आवासीय प्रोजेक्ट्स के खरीदारों को समर्थन और प्रॉपर्टी सेक्टर में विश्वास बहाली को भी जरूरी बताया गया है। IMF के मुताबिक इन नीतिगत सुधारों से पांच वर्षों में खपत-से-जीडीपी अनुपात में लगभग 4 प्रतिशत अंकों की वृद्धि संभव है।
चूंकि वैश्विक विकास में चीन की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है, इसलिए उसकी संतुलित और मजबूत अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत मानी जाएगी।



