
तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते भारत में शहरों की बुनियादी ढांचा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों के बीच आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने म्युनिसिपल बॉन्ड बाजार को नई मजबूती देने के लिए निर्णायक पहल की है। 18 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय परामर्श “म्युनिसिपल बॉन्ड्स अनपैक्ड – ए डायलॉग विद द इंटरमीडियरीज़” के माध्यम से मंत्रालय ने शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के लिए वैकल्पिक वित्तपोषण के स्रोतों को सशक्त बनाने पर व्यापक मंथन किया।
इस महत्वपूर्ण विचार-विमर्श में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, बाजार नियामक, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां, मर्चेंट बैंकर, लेनदेन सलाहकार और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य स्पष्ट था—शहरों को पूंजी बाजार तक संरचित और टिकाऊ तरीके से पहुंच उपलब्ध कराना तथा म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया को अधिक सक्षम, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना।
मंत्रालय के सचिव श्री श्रीनिवास कटिकिथला ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सरकार शहरों को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने रेखांकित किया कि म्युनिसिपल बॉन्ड न केवल शहरी बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक हैं, बल्कि सेवा वितरण की गुणवत्ता सुधारने में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने नवोन्मेषी वित्तीय तंत्रों को भविष्य की जरूरत बताते हुए शहरों को बाजार आधारित संसाधन जुटाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव सुश्री डी. तारा ने अब तक यूएलबी द्वारा जारी किए गए म्युनिसिपल बॉन्ड के अनुभव साझा किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कई शहरों ने पूंजी बाजार का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, लेकिन इस प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर अपनाने के लिए क्षमता निर्माण, मजबूत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और संस्थागत ढांचे को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने रखे ठोस सुझाव
पारदर्शिता, साख और निवेशक विश्वास पर जोर
परामर्श में बाजार और नियामकीय पक्ष से जुड़े विशेषज्ञों ने भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए। सेबी के पूर्व कार्यकारी निदेशक श्री प्रमोद राव ने म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए अनुकूल नियामकीय वातावरण विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रक्रियात्मक सरलता से शहरों की भागीदारी बढ़ेगी।
आईसीआरए के उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख श्री सुप्रियो बनर्जी ने यूएलबी की क्रेडिट रेटिंग को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजकोषीय अनुशासन, समयबद्ध और सटीक वित्तीय रिपोर्टिंग, पारदर्शिता तथा मजबूत राजस्व स्रोत निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए अनिवार्य हैं।
टीआईपीएसओएन ग्रुप के मुख्य व्यवसाय अधिकारी श्री उमेश खंडेलवाल ने लेनदेन सलाहकारों और मर्चेंट बैंकरों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पेशेवर संरचना और स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण से बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। वहीं, एनआईएसएम के निदेशक श्री शशि कृष्णन ने भारत में एक सशक्त और जीवंत म्युनिसिपल ऋण बाजार विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. धीरज जैन ने किया।
चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति बनी कि म्युनिसिपल बॉन्ड शहरी बुनियादी ढांचे के लिए संसाधन जुटाने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। इससे शहरों की वित्तीय स्वायत्तता बढ़ेगी और टिकाऊ व लचीले शहरीकरण के लक्ष्य को गति मिलेगी।
मंत्रालय ने दोहराया कि वह सभी हितधारकों के साथ मिलकर एक मजबूत म्युनिसिपल वित्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल भारत के तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य में वित्तीय नवाचार को बढ़ावा देने और शहरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



