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बीजेपी को नया अध्यक्ष चुनने में इतनी देर क्यों लग रही है

भारतीय जनता पार्टी का नया अध्यक्ष कौन होगा? पार्टी अध्यक्ष के तौर पर जगत प्रकाश नड्डा का कार्यकाल खत्म हो गया है.
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में हर तरफ इस सवाल की चर्चा है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार को दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के घर पर इसे लेकर गहन मंथन किया गया.

रिपोर्ट्स की मानें तो इस बैठक में राजनाथ सिंह के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी महासचिव बीएल संतोष के साथ-साथ संघ की तरफ से महासचिव दत्तात्रेय होसबले और संयुक्त महासचिव अरुण कुमार मौजूद थे.
महीनों से इस पद के लिए कई नेताओं के नाम रेस में चल रहे हैं, बावजूद इसके घंटों चली इस अहम बैठक में भी किसी के नाम पर मुहर लगने की ख़बर नहीं आई है
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी को अपना नया अध्यक्ष चुनने में इतनी देर क्यों लग रही है?
क्या एक बार फिर जेपी नड्डा का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है? क्या ओबीसी वर्ग से कोई नया चेहरा इस पद पर देखने को मिल सकता है?

चार राज्यों के चुनाव बने वजह?

देश के चार राज्यों महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड और जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत अत्री का मानना है कि चुनावों को देखते हुए बीजेपी अपनी वर्तमान स्थिति कायम रखना चाहती है, क्योंकि जेपी नड्डा के साथ सरकार का कंफर्ट लेवल अच्छा है.

वे कहते हैं, “चुनावों में दो महीने का वक्त बचा है. ऐसे में अध्यक्ष पद पर किसी नए व्यक्ति को लाने से मुश्किलें बढ़ेंगी, क्योंकि उन्हें चीजों को समझने में बहुत वक्त लग जाएगा. ऐसा नहीं है कि पार्टी के पास नाम नहीं हैं, बस वे यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं और राज्यों के चुनाव निकाल लेना चाहते हैं.”

वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ पत्रकार विजय त्रिवेदी ऐसा नहीं मानते. उनका कहना है कि चार राज्यों के चुनावों का अध्यक्ष पद से खास लेना देना नहीं है.

विजय त्रिवेदी कहते हैं, “पार्टी संविधान के मुताबिक कम से कम 15 साल से जो व्यक्ति पार्टी का सदस्य होगा वही अध्यक्ष बन सकता है. ऐसे में जो भी व्यक्ति आएगा, वह संगठन को पहले से जानता होगा. सिर्फ जिम्मेदारियां बदलती हैं. इसलिए नए व्यक्ति को संगठन समझने में बहुत वक्त नहीं लगेगा.”

वे कहते हैं, “बीजेपी, क्षेत्रीय पार्टियों की तरह नहीं है. मायावती, अखिलेश यादव, स्टालिन जैसे नेताओं की पार्टियों में अध्यक्ष एक बॉस की तरह काम करते हैं, जो बीजेपी में नहीं है. यहां एक स्ट्रक्चर है जिसका मुखिया समय समय पर बदलता रहता है.”

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