पर्यावरण

कोयला क्षेत्र में ‘तकनीकी क्रांति’ के दावे, जमीनी असर पर सवाल

बैठक में भविष्य की योजनाएं, पर्यावरण और वैकल्पिक ऊर्जा पर चुप्पी

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय की परामर्श समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन और डिजिटल बदलाव को लेकर कई दावे किए गए। हालांकि बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों और योजनाओं के बीच यह सवाल भी उठने लगा कि क्या तकनीकी उन्नयन की घोषणाएं वास्तव में कोयला क्षेत्र की जमीनी चुनौतियों को हल कर पाएंगी।

बैठक में कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, समिति के सदस्य सांसद, कोयला मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा विभिन्न कोयला कंपनियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंत्रालय के अधिकारियों ने ‘कोयला कंपनियों में प्रौद्योगिकी उन्नयन’ को लेकर सरकार की नीतिगत पहलों, प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर प्रस्तुति दी।

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने बताया कि वर्तमान में देश में कोयले की मांग अभूतपूर्व स्तर पर है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच भारत की कोयले पर भारी निर्भरता लंबे समय में चुनौती बन सकती है।

बैठक में मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रौद्योगिकी उन्नयन अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन गया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ड्रोन सर्वेक्षण, 3डी लेजर स्कैनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के माध्यम से खनन को सुरक्षित और स्मार्ट बनाने की दिशा में काम कर रही है। साथ ही कार्बन कैप्चर, बायोमास को-फायरिंग और कोल गैसीफिकेशन जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने की बात भी कही गई।

कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम ने बताया कि कंपनी अन्वेषण और खनन के लिए आधुनिक उपकरणों के उपयोग के साथ-साथ रेलवे कॉरिडोर और कन्वेयर सिस्टम के जरिए कोयला परिवहन को बेहतर बनाने पर काम कर रही है। इसके अलावा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के तहत एसएपी ईआरपी और 5जी आधारित आईओटी सिस्टम लागू किए जा रहे हैं।

हालांकि ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उन्नयन के बावजूद कोयला क्षेत्र को पर्यावरणीय प्रभाव, प्रदूषण और स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती मांग जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में केवल तकनीकी घोषणाएं ही पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि ऊर्जा नीति में व्यापक बदलाव भी आवश्यक होगा।

बैठक में मौजूद समिति के सदस्यों ने मंत्रालय के प्रयासों की सराहना की और उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकी सुधारों को और तेज करने के सुझाव दिए।

फिलहाल सवाल यही है कि क्या कोयला क्षेत्र में घोषित ये तकनीकी बदलाव वास्तव में स्थायी समाधान साबित होंगे या फिर ये दावे केवल बैठकों और प्रस्तुतियों तक ही सीमित रह जाएंगे।

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