मां और शिशु की सुरक्षा पर फोकस: एंटीनटल फिटल वेल-बीइंग पर सेमिनार में विशेषज्ञों ने साझा की अहम जानकारियां
“फिटल मॉनिटरिंग के आधुनिक तरीके बने चर्चा का केंद्र: पीजी स्कॉलर ने आसान भाषा में समझाया जटिल विषय”

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क)
निस्वान वा क़बालत विभाग में 25 अप्रैल 2026 को आयोजित एक अकादमिक संगोष्ठी में “एंटीनटल असेसमेंट ऑफ फिटल वेल-बीइंग” विषय पर गहन चर्चा की गई। इस सेमिनार का संचालन पीजी स्कॉलर डॉ. ऐमन कुलसुम नसीम ने किया, जिसमें उन्होंने गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की स्थिति का आकलन करने के विभिन्न तरीकों को विस्तार से प्रस्तुत किया।
अपने प्रस्तुतीकरण में डॉ. ऐमन ने भ्रूण स्वास्थ्य की निगरानी के महत्व, मातृ जोखिम कारकों और फिटल कंप्रोमाइज की जटिल प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया। उन्होंने क्लिनिकल और बायोफिजिकल दोनों प्रकार के मूल्यांकन तरीकों को स्पष्ट करते हुए बताया कि समय पर सही आकलन से जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सेमिनार में फिटल सर्विलांस के विभिन्न आधुनिक तरीकों जैसे फिटल मूवमेंट काउंटिंग, अल्ट्रासोनोग्राफी (USG), बायोफिजिकल प्रोफाइल (BPP), कार्डियोटोकोग्राफी (CTG) और डॉप्लर वेलोसिमेट्री पर विशेष चर्चा की गई। इन तकनीकों के उपयोग, परिणामों की व्याख्या और उनके आधार पर किए जाने वाले उपचार प्रोटोकॉल को भी विस्तार से समझाया गया।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. मणि राम सिंह और डॉ. मरियम रोकैया सहित कई फैकल्टी सदस्य और पीजी छात्र उपस्थित रहे। चर्चा सत्र में प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई, जहां डॉ. फातिमा सिद्दीकी ने NST और CTG के तकनीकी अंतर पर सवाल उठाया, जिसका विस्तृत समाधान किया गया।
प्रो. मणि राम सिंह ने विषय की व्यापकता को देखते हुए इसे भविष्य में दो भागों—सैद्धांतिक और व्यावहारिक—में विभाजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने डॉ. ऐमन की सराहना करते हुए कहा कि कम समय में इतनी प्रभावशाली प्रस्तुति देना उनकी दक्षता को दर्शाता है।
यह सेमिनार न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि प्रतिभागियों के लिए एक इंटरैक्टिव और उपयोगी शैक्षणिक अनुभव भी साबित हुआ।



