“श्वसन रोगों का छुपा खतरा उजागर: देश के दिग्गज डॉक्टरों ने दिए आधुनिक इलाज के नए फार्मूले”
“टीबी से जुड़ी प्लूरल बीमारियों पर बड़ा अलर्ट: लखनऊ संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताई गंभीर तस्वीर”

(निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क)
लखनऊ के गोमती नगर स्थित Hotel Taj Mahal में आयोजित “सिम्पोज़ियम ऑन प्लूरल डिज़ीज़” ने श्वसन रोगों के एक ऐसे पहलू को सामने रखा, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इस महत्वपूर्ण संगोष्ठी में देशभर के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया और प्लूरल रोगों की बढ़ती चुनौती पर गहन चर्चा की।

विशेषज्ञों के अनुसार, प्लूरल डिज़ीज़ अब वैश्विक स्तर पर तेजी से उभरती स्वास्थ्य समस्या बन रही है। हर दस लाख आबादी पर 320 से 1300 मामलों का सामने आना इसकी गंभीरता को दर्शाता है। भारत में स्थिति और चिंताजनक है, जहां तपेदिक (टीबी) से जुड़े 30 से 80 प्रतिशत मामलों में प्लूरल इफ्यूजन पाया जाता है। इतना ही नहीं, लगभग एक-तिहाई टीबी मरीजों में प्लूरल रोग विकसित हो जाता है।
संगोष्ठी का उद्घाटन पद्मश्री सम्मानित वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समय पर पहचान और सही उपचार के अभाव में ये रोग जानलेवा साबित हो सकते हैं। एम्पायमा, ट्रैप्ड लंग और प्लूरल थिकनिंग जैसी जटिलताएं मरीजों की स्थिति को गंभीर बना देती हैं, जिनमें मृत्यु दर 10 से 20 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
कार्यक्रम में डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. मनोज के. गोयल, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ. अंकित शर्मा और डॉ. अभिनव गुलियानी जैसे दिग्गज विशेषज्ञों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञों ने प्लूरल इफ्यूजन के सटीक और शीघ्र निदान, प्रमाण-आधारित ड्रेनेज तकनीकों, जटिल मामलों के प्रबंधन और इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी में हो रही नई प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और समय पर हस्तक्षेप से इन बीमारियों के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आयोजकों ने बताया कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों के बीच जागरूकता बढ़ाना और उपचार की एक समान प्रणाली विकसित करना है, ताकि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध इलाज मिल सके। खासकर उन क्षेत्रों में जहां टीबी का प्रकोप अधिक है, यह पहल बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
यह संगोष्ठी न केवल चिकित्सा विशेषज्ञों के लिए ज्ञानवर्धक रही, बल्कि भविष्य में श्वसन रोगों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम भी साबित होगी।



