सागर, मध्य प्रदेश: सागर जिले के बंडा तहसील से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक परिवार का सालाना आय प्रमाण पत्र केवल 2 रुपये दर्शाता है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब इस प्रमाण पत्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिससे इसकी सच्चाई का पर्दाफाश हुआ।
प्रमाण पत्र की कहानी
अधिकतर लोग छात्रवृत्ति या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आय प्रमाण पत्र की मांग करते हैं। गांवों में वकीलों को पैसे देकर आसानी से आय प्रमाण पत्र बनवाए जाते हैं, जिनमें आमतौर पर कम से कम आय 24,000 रुपये सालाना दिखाई जाती है। लेकिन इस परिवार का मामला तो इसके विपरीत है, जहां केवल 2 रुपये की आय दर्शाई गई है।
आय प्रमाण पत्र में पूरे परिवार की कुल आय 2 रुपये बताई गई है, जो कि काफी चौंकाने वाला है। यह प्रमाण पत्र बंडा तहसील के तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान के हस्ताक्षर के बाद जारी किया गया था।
तहसीलदार का बयान
तहसीलदार महेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि यह मामला मेरी पदस्थापना से पहले का है और इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, “यदि यह प्रमाण पत्र सही नहीं है, तो इसे ठीक कराया जाएगा।”
वायरल पोस्ट के बाद की जांच
सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मामले की गहराई में जाकर जांच की गई। पता चला कि यह आय प्रमाण पत्र घूघरा गांव के निवासी बलराम चढ़ार का है, जिसने जनवरी में आवेदन किया था। बलराम ने आवेदन में अपनी आय 40,000 रुपये बताई थी, लेकिन ऑनलाइन आवेदन करते समय गलती से 2 रुपये दर्ज कर दिया गया।
जब यह आवेदन तहसील कार्यालय से होकर गुजरा, तब संबंधित क्लर्क से लेकर तहसीलदार तक ने इस गलती पर ध्यान नहीं दिया और प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
संभावित कार्रवाई
इस घटना के बाद तहसीलदार ने बताया कि यह मामला गंभीर है और इसकी जांच की जाएगी। जब उनसे पूर्व तहसीलदार ज्ञानचंद्र राय के बारे में पूछा गया, जिन्होंने प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर किए, तो उन्होंने बिना जवाब दिए फोन काट दिया।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सरकारी कार्यप्रणाली में ऐसी चूकें कैसे होती हैं और ऐसे मामलों में सुधार कैसे किया जा सकता है। क्या यह केवल एक तकनीकी गलती है या किसी बड़े सिस्टम की खामियों को दर्शाता है? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।