दिल्ली: सस्पेंड ट्रेनी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी 4 अक्टूबर तक टाल दी है, जिससे उन्हें कुछ और समय मिल गया है। इससे पहले पूजा की गिरफ्तारी पर मिली छूट आज समाप्त हो रही थी, लेकिन अदालत ने उनके वकीलों की अपील पर एक हफ्ते का अतिरिक्त समय देते हुए उन्हें अस्थायी राहत प्रदान की है।
पूजा के वकीलों ने की अपील
पूजा खेडकर के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज होने के बाद ही आरोप लगाए गए थे, जिससे पूजा भारी दबाव में हैं। उन्होंने बताया कि मीडिया का पूरा ध्यान पूजा खेडकर पर केंद्रित है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। वकीलों ने अदालत से पूजा को दस्तावेज़ जमा करने के लिए 15 दिनों की मोहलत मांगी थी, हालांकि अदालत ने सिर्फ एक हफ्ते का समय दिया। वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि पूजा कहीं फरार नहीं हुई हैं और वर्तमान में पुणे में हैं।
क्या हैं पूजा खेडकर पर लगे आरोप?
पूजा खेडकर 2023 बैच की ट्रेनी आईएएस अधिकारी हैं, जिन्होंने UPSC सिविल सर्विसेज एग्जाम 2022 में 841वीं रैंक हासिल की थी। उनकी ट्रेनिंग मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में चल रही थी।
पूजा खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने आरक्षण का लाभ लेने के लिए UPSC को गलत जानकारी दी। यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने ओबीसी और विकलांग व्यक्तियों के लिए विशेष छूट का लाभ उठाया था, जबकि वे गैर-क्रीमी लेयर ओबीसी कोटे के लिए योग्य नहीं थीं। इसके अलावा, आरोप है कि उनके पिता, जो महाराष्ट्र सरकार के पूर्व अधिकारी हैं, के पास 40 करोड़ रुपये की संपत्ति थी, जिससे वे ओबीसी के अंतर्गत आने वाली विशेष सुविधाओं का लाभ नहीं ले सकती थीं।
कोर्ट की अगली सुनवाई और आगे की कार्रवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 4 अक्टूबर को होगी, जहां अदालत पूजा द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज़ों की जांच करेगी। पूजा खेडकर के वकील इस दौरान कोर्ट के समक्ष अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त समय मांग सकते हैं। फिलहाल, उन्हें गिरफ्तारी से आंशिक राहत मिल गई है, लेकिन मामला गंभीर बना हुआ है, और इसकी अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
मीडिया और पब्लिक की प्रतिक्रिया
पूजा खेडकर के मामले ने मीडिया में काफी चर्चा बटोरी है। उनकी गिरफ्तारी को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों की अलग-अलग राय सामने आई है। जहां कुछ लोग उन्हें निर्दोष बताते हुए उनकी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं अन्य का मानना है कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह एक बड़ी अनियमितता है।