बिज़नेस

बिक्री की रफ्तार थमी, खर्चों ने मुनाफे पर डाला दबाव

कर्ज पर बढ़ती निर्भरता, कंपनियों की वित्तीय सेहत पर उठे सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

Reserve Bank of India की ताज़ा रिपोर्ट ने निजी क्षेत्र की कंपनियों की चमक के पीछे छिपी कई चिंताजनक सच्चाइयों को उजागर कर दिया है। गैर-सरकारी गैर-वित्तीय (NGNF) प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों की बिक्री वृद्धि 2024-25 में घटकर 11.4% रह गई, जो पिछले साल के मुकाबले धीमी है। यह संकेत देता है कि बाजार में मांग की रफ्तार कमजोर पड़ रही है।

जहां एक ओर सेवाक्षेत्र ने कुछ हद तक प्रदर्शन संभाला, वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार और धीमी हो गई। इससे साफ है कि औद्योगिक गतिविधियों में अपेक्षित तेजी नहीं आ रही है। दूसरी ओर, कंपनियों के खर्च तेजी से बढ़े हैं—खासतौर पर उत्पादन लागत और कर्मचारियों के वेतन में इजाफा हुआ है—जिससे मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।

हालांकि रिपोर्ट में मुनाफे में वृद्धि का दावा किया गया है, लेकिन यह वृद्धि मुख्य रूप से सेवाक्षेत्र तक सीमित है। व्यापक स्तर पर देखा जाए तो कंपनियों की दक्षता घटी है, क्योंकि संपत्तियों के मुकाबले बिक्री का अनुपात कम हुआ है।

सबसे चिंताजनक पहलू है बाहरी फंडिंग पर बढ़ती निर्भरता। Ministry of Corporate Affairs से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों के कुल फंड में बाहरी स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़कर 53.6% हो गई है। यह इशारा करता है कि कंपनियां अपने संचालन के लिए कर्ज और देनदारियों पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं।

हालांकि कर्ज-इक्विटी अनुपात में कमी और ICR में मामूली सुधार दिखाया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार टिकाऊ नहीं हो सकता। बढ़ती लागत, धीमी बिक्री और कर्ज पर निर्भरता आने वाले समय में कॉरपोरेट सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है।

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