खेती-किसानी

हर राज्य बनाए अपनी रणनीति,लखनऊ में कृषि का महामंथन,

नकली बीज-खाद पर सख्ती, तकनीक से बदलेगी खेती की तस्वीर

निश्चय टाइम्स | न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्र कृषि सम्मेलन ने देश की कृषि दिशा को लेकर बड़ा संदेश दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के इस आयोजन में केंद्र और राज्यों के मंत्री, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे, जहां खेती को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने पर गंभीर मंथन हुआ।

केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने सम्मेलन में स्पष्ट कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में एक समान कृषि नीति कारगर नहीं हो सकती। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे अपनी जलवायु, मिट्टी और संसाधनों के अनुसार कृषि रोडमैप तैयार करें। उन्होंने अच्छे बीज, किसान आईडी और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि किसानों को समय पर सस्ती दर पर ऋण और योजनाओं का लाभ मिल सके।

शिवराज सिंह चौहान ने नकली खाद, बीज और कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई और कहा कि यदि किसानों को सही इनपुट नहीं मिलेगा, तो उत्पादन और आय दोनों प्रभावित होंगे। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही इंटीग्रेटेड फार्मिंग, फसल विविधीकरण, पशुपालन, मत्स्यपालन और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्पों को अपनाने की बात कही, जिससे किसानों की आय के कई स्रोत विकसित हो सकें।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने कहा कि वैज्ञानिक शोध तभी सफल होगा, जब उसका लाभ सीधे खेत तक पहुंचेगा। उन्होंने तकनीक, प्रशिक्षण और वैल्यू एडिशन को खेती में परिवर्तन का आधार बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में अब किसान बहु-फसली मॉडल अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसे प्रोसेसिंग, बाजार और प्रतिस्पर्धा से जोड़ना होगा। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और वे कृषि उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

सम्मेलन में खरीफ और रबी फसलों की तैयारी पर साझा एजेंडा तैयार किया गया। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने, कृषि विज्ञान केंद्रों को सक्रिय बनाने और नई तकनीकों को खेत तक पहुंचाने की रणनीति बनाई गई।

इस अवसर पर कई राज्यों के कृषि मंत्रियों और अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाला समय तकनीक आधारित, क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप और किसान-केंद्रित कृषि का होगा।

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