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यूपी में मातृ-शिशु सुरक्षा को नई ताकत, 3.7 लाख डोज खरीदी

एनीमिया पर बड़ा वार—अब एक इंजेक्शन से होगा गंभीर इलाज

निश्चय टाइम्स | न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में बढ़ती Anemia (खून की कमी) की समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आधुनिक इलाज की शुरुआत की है। अब गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं का इलाज केवल एक इंजेक्शन के जरिए संभव होगा, जिससे उपचार प्रक्रिया सरल और प्रभावी बनेगी।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इंट्रावीनस आयरन की 3.7 लाख खुराक खरीदी है। इस नई तकनीक में फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज जैसे आधुनिक इंजेक्शन का उपयोग किया जाएगा, जिसकी एक ही डोज गंभीर एनीमिया के इलाज में कारगर साबित होती है। इससे न केवल मरीजों को बार-बार दवाएं लेने की जरूरत कम होगी, बल्कि इलाज की सफलता दर भी बढ़ेगी।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2006 में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की दर 52 प्रतिशत थी, जो 2021 तक घटकर 46 प्रतिशत हो गई है। वहीं किशोरियों में यह दर 56.5 प्रतिशत से घटकर 52.9 प्रतिशत तक पहुंची है। इसके अलावा, आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंटेशन की कवरेज प्रदेश में 95 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो एक सकारात्मक संकेत है।

महानिदेशक प्रशिक्षण डॉ. रंजना खरे ने कहा कि एनीमिया नियंत्रण कार्यक्रमों की सफलता के लिए नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि अब तक 10,000 से अधिक जिला और ब्लॉक स्तर के चिकित्सा अधिकारियों और स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिससे इस अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूती मिल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई पहल से मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी, क्योंकि एनीमिया गर्भावस्था के दौरान एक गंभीर जोखिम कारक माना जाता है। एक इंजेक्शन आधारित यह उपचार प्रणाली ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से लागू की जा सकेगी

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