
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से शुक्राणु डीएनए की होगी सटीक जांच; स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने किया दीप प्रज्ज्वलन
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
राजधानी लखनऊ के प्रसिद्ध विवेकानन्द पॉलीक्लिनिक एवं आयुर्विज्ञान संस्थान में आज चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण लाइव कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। संस्थान के स्त्री व प्रसूति रोग तथा इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य विषय “वीर्य विश्लेषण” था। इस उच्च स्तरीय वैज्ञानिक कार्यक्रम को उत्तर प्रदेश इंडियन सोसायटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (यूपी-आईएसएआर), एड्वी बायोसाइंसेज़ और एक्सियोकेयर के सहयोग से संपन्न कराया गया।
शनिवार, 30 मई 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का शानदार शुभारम्भ परम पूजनीय स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज द्वारा पारम्परिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस मौके पर यूपी-आईएसएआर की अध्यक्ष डॉ. राजुल त्यागी और सचिव डॉ. सीमा पाण्डेय सहित चिकित्सा क्षेत्र के कई गणमान्य डॉक्टर उपस्थित रहे। स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को हमेशा करुणामय स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा नैतिकता (मेडिकल एथिक्स) के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि मानवता की निःस्वार्थ सेवा हो सके।

कार्यशाला के मुख्य वक्ता और देश के जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. केशव मल्होत्रा ने आईवीएफ और आईयूआई तकनीकों में आ रहे आधुनिक बदलावों पर बेहद ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिए। उन्होंने मुख्य रूप से जीवित गतिशील शुक्राणुओं को अलग करने की उन्नत तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से शुक्राणु डीएनए विखण्डन (DNA Fragmentation) के सटीक विश्लेषण पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे एआई तकनीक के जरिए निसंतान दंपतियों के लिए आईवीएफ के परिणामों को और बेहतर तथा सफल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान “असामान्य वीर्य विश्लेषण रिपोर्ट की स्थिति में आगे की चिकित्सीय कार्यवाही” विषय पर एक विशेष परिचर्चा का भी आयोजन किया गया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके अलावा डॉक्टरों और एम्ब्रियोलॉजिस्ट को आधुनिक मशीनों पर प्रायोगिक प्रदर्शन (लाइव डेमो) भी दिखाया गया। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में चिकित्सकों, भ्रूण-विज्ञान विशेषज्ञों और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और आधुनिक प्रजनन चिकित्सा के गुर सीखे।


