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10 साल बाद बोर्ड से ब्रेक जरूरी

RBI ने सहकारी बैंकों में लंबे कब्जे पर कसी लगाम

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ग्रामीण सहकारी बैंकों की पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। RBI ने “रूरल को-ऑपरेटिव बैंक्स गवर्नेंस अमेंडमेंट डायरेक्शंस 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें राज्य सहकारी बैंक (StCB) और केंद्रीय सहकारी बैंक (CCB) के निदेशकों के कार्यकाल को लेकर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।

नए मसौदे के अनुसार अब कोई भी निदेशक लगातार 10 साल तक ही किसी एक सहकारी बैंक के बोर्ड में रह सकेगा। इसके बाद उसे कम से कम 3 साल का “कूलिंग ऑफ पीरियड” पूरा करना होगा। इस दौरान वह संबंधित बैंक से किसी भी पद या भूमिका में नहीं जुड़ सकेगा, केवल सदस्य या ग्राहक के रूप में संबंध रख सकेगा। हालांकि, वह किसी दूसरे बैंक के बोर्ड में नियुक्त हो सकता है।

RBI ने कहा कि कुछ मामलों में निदेशक नियमों से बचने के लिए थोड़े समय के लिए इस्तीफा देकर फिर दोबारा बोर्ड में शामिल हो जाते थे। इससे वे कानूनी सीमा से ज्यादा समय तक बैंक के नियंत्रण में बने रहते थे। केंद्रीय बैंक ने इसे कानून की भावना के खिलाफ माना है।

ड्राफ्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी निदेशक का कार्यकाल बीच में तीन साल से कम समय के लिए टूटा है, तो उसे लगातार सेवा माना जाएगा। यानी छोटी अवधि के इस्तीफे या ब्रेक का फायदा लेकर दोबारा लंबी अवधि तक पद पर बने रहने की अनुमति नहीं मिलेगी।

RBI का मानना है कि इन बदलावों से सहकारी बैंकों में जवाबदेही बढ़ेगी, नए लोगों को अवसर मिलेगा और लंबे समय से बने शक्ति केंद्रों पर रोक लगेगी। यह संशोधन तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने का प्रस्ताव है।

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