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भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स देशों का बड़ा कदम: एमएसएमई को तकनीक से मजबूत करने पर बनी सहमति

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डिजिटल समावेशन और कौशल विकास से सुधरेगी छोटे उद्योगों की सेहत; रोजगार सृजन पर दिया गया विशेष जोर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारत की प्रतिष्ठित ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत देश ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के नेतृत्व में नई औद्योगिक क्रांति के लिए ब्रिक्स साझेदारी (पार्टएनआईआर) ट्रैक के तहत द्वितीय एसएमई कार्य समूह की बैठक का ऑनलाइन माध्यम से सफल आयोजन किया गया। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य विषय “एमएसएमई के लिए प्रौद्योगिकी तक पहुंच बढ़ाना” रहा।

गौरतलब है कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान तीन विशेष एसएमई कार्य समूह की बैठकों और पहले ब्रिक्स एमएसएमई फोरम की मेजबानी कर रहा है। ये सभी आयोजन छोटे उद्योगों के लिए वित्त की उपलब्धता, तकनीक तक पहुंच और स्थिरता-उन्मुख विकास जैसे तीन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इसी सिलसिले में 24 अप्रैल को हुई पहली बैठक के बाद इस दूसरी बैठक का आयोजन 26 मई 2026 को किया गया।

बैठक के दौरान सदस्य देशों के बीच “एमएसएमई के लिए नवाचारों और प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण का लाभ उठाना” तथा “उद्योग-तैयार मानव संसाधन के कौशल उन्नयन (अपस्किलिंग)” जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई। सभी ब्रिक्स देशों ने माना कि वैश्विक बाजार में टिके रहने के लिए पारंपरिक उद्योगों को डिजिटल रूप से सशक्त करना और उनके तकनीकी अंतर को पाटना बेहद जरूरी है। इसके लिए डिजिटल समावेशन और मजबूत नवाचार क्षमताओं को बढ़ावा देने पर एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता रेखांकित की गई।

यह बैठक आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और समावेशी विकास में एमएसएमई की भूमिका को मजबूत करने के लिहाज से बेहद फलदायी रही। समान विकासात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे ब्रिक्स देशों ने सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा किया, जिससे भविष्य में छोटे उद्योगों के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (ग्लोबल वैल्यू चेन) का हिस्सा बनना और आसान हो जाएगा।

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