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बरेली यूनानी मेडिकल कॉलेज पर अफसरशाही का खेल? तैयार भवन के बावजूद शुरू नहीं हुआ संस्थान

यूनानी कॉलेज को बदलने की साजिश का आरोप, आयुष विभाग पर गंभीर सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित हजियापुर में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए पहले राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यूनानी चिकित्सा जगत से जुड़ी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि विभागीय स्तर पर लापरवाही, अफसरशाही और अंदरूनी खेल के कारण कॉलेज का संचालन एक वर्ष से शुरू नहीं हो सका।

आरोप है कि उत्तर प्रदेश यूनानी विभाग के निदेशक Jamal Akhtar और विभागीय बाबू इंकबाल सिद्दीकी की कथित कार्यशैली के चलते न केवल कॉलेज शुरू होने में देरी हुई बल्कि सरकार की बड़ी उपलब्धि भी अधर में लटक गई। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित अधिकारियों ने मंत्री स्तर तक सही जानकारी नहीं पहुंचाई, जिससे पूरे मामले में भ्रम की स्थिति बनी रही।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब खबरें सामने आईं कि यूनानी चिकित्सा पद्धति के लिए विशेष रूप से निर्मित इस मेडिकल कॉलेज में किसी अन्य संस्थान को स्थानांतरित करने की तैयारी की जा रही है। इस प्रस्ताव का विभिन्न यूनानी संगठनों ने तीखा विरोध किया है।

एक ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय आयुष मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि कॉलेज को उसके मूल स्वरूप में जल्द शुरू किया जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि यह कॉलेज बरेली मंडल का पहला सरकारी यूनानी मेडिकल कॉलेज है और इसके शुरू होने से हजारों छात्रों तथा मरीजों को लाभ मिलेगा।

संगठनों का कहना है कि यदि इस कॉलेज का उद्देश्य बदला गया तो यह यूनानी चिकित्सा पद्धति के साथ अन्याय होगा। साथ ही छात्रों के लिए शिक्षा के अवसर खत्म होंगे और क्षेत्र में सस्ती एवं पारंपरिक चिकित्सा सुविधा प्रभावित होगी।

यूनानी जगत से जुड़े लोगों ने सवाल उठाया है कि जब भवन निर्माण पूरा हो चुका है तो आखिर कॉलेज संचालन में देरी क्यों हो रही है। मामले को लेकर आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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