दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण पर मोदी सरकार का महा-एक्शन
पुराने ट्रकों-बसों को हटाने के लिए ₹9,585 करोड़ मंजूर

बीएस-IV वाहनों पर चलेगा हंटर, नया वाहन खरीदने पर मिलेगी 5% ब्याज सब्सिडी और 8% की भारी छूट
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में फेफड़ों को छलनी करने वाले जानलेवा वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मोदी कैबिनेट ने एक बेहद आक्रामक और ऐतिहासिक दो वर्षीय योजना को हरी झंडी दे दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनसीआर क्षेत्र से खटारा और धुआं उगलने वाले पुराने ट्रकों और बसों को पूरी तरह साफ करने के लिए 9,585 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया है। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) इस पूरी योजना का वित्तपोषण करेगा, जबकि इसका जमीनी कार्यान्वयन परिवहन मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के सहयोग से करेंगे।
परिवहन क्षेत्र का खौफनाक सच: 3% वाहन फैला रहे हैं 36% प्रदूषण एआरएआई (ARAI) और टेरी (TERI) की रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि एनसीआर में कुल वाहनों की संख्या में ट्रकों और बसों की हिस्सेदारी महज 3 प्रतिशत है, लेकिन हवा में घुलने वाले खतरनाक पीएम 2.5 कणों में इनका योगदान 36 प्रतिशत है। एक पुराना वाहन 14 नए बीएस-VI वाहनों के बराबर जहर उगलता है। इसी जहरीले तंत्र को ध्वस्त करने के लिए इस योजना के तहत दिल्ली-एनसीआर के करीब 2.07 लाख वाहन मालिकों (1.91 लाख ट्रक और 16,329 बसें) को सीधे तौर पर टारगेट किया जा रहा है। नीति के तहत बीएस-III या उससे पुराने वाहनों को कबाड़ (स्क्रैप) करना अनिवार्य होगा, जबकि नए वाहन के रूप में केवल बीएस-VI या इलेक्ट्रिक वाहन (EV) ही खरीदे जा सकेंगे।
सब्सिडी की बौछार और डिजिटल निगरानी: कैबिनेट सचिव करेंगे मॉनिटरिंग इस महा-योजना को सफल बनाने के लिए सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों ने फायदों का पिटारा खोल दिया है:
- ब्याज और ईंधन पर राहत: केंद्र सरकार नए वाहन के लोन पर 5% की ब्याज सब्सिडी और ₹4,800 तक के मासिक ईंधन वाउचर देगी।
- टैक्स और शोरूम छूट: राज्य सरकारें 10 साल के लिए शत-प्रतिशत मोटर वाहन कर और पंजीकरण शुल्क माफ करेंगी। वहीं वाहन निर्माता कंपनियां एक्स-शोरूम कीमत पर 8% की सीधी छूट देंगी।
कड़ा प्रशासनिक पहरा: इस पूरी योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह डिजिटल पोर्टल के जरिए होगा। योजना की रीढ़ को मजबूत रखने के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक हाई-पावर कमेटी बनाई गई है, जिसमें नीति आयोग के सीईओ और राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं। जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट (DM) खुद इसकी निगरानी करेंगे ताकि दिल्ली की आबोहवा को जल्द से जल्द स्वच्छ बनाया जा सके।


