
पश्चिम एशिया संकट और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र बंद होने से चरमराई व्यवस्था, जनता पर बढ़ेगा बोझ
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
देश का विमानन (Aviation) क्षेत्र इस समय इतिहास के सबसे भीषण और खौफनाक वित्तीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेक चुकी भारतीय एयरलाइंस को डूबने से बचाने के लिए मोदी कैबिनेट ने आनन-फानन में ₹10,000 करोड़ रुपये के ‘मूल्य स्थिरीकरण कोष’ (Price Stabilization Fund) को मंजूरी दी है। सरकार भले ही इसे राहत पैकेज के रूप में पेश कर रही हो, लेकिन कड़वा सच यह है कि यह करदाताओं की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ब्याज मुक्त अग्रिम के रूप में देकर विमानन उद्योग के छेद को ढकने की नाकाम कोशिश की जा रही है।
ढाई गुना महंगी हुई उड़ान: ओएमसी और एयरलाइंस का नेक्सस
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि सरकार की नीतियां स्थिति को संभालने में पूरी तरह नाकाम रही हैं।
- ईंधन की कीमतों में आग: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ (Aviation Turbine Fuel) की कीमतें मार्च 2026 में ₹60.50 प्रति लीटर से बढ़कर मई 2026 में सीधे ₹142 प्रति लीटर पहुंच गईं। मात्र दो महीने में लगभग ढाई गुना की यह अप्रत्याशित वृद्धि यह साबित करती है कि वैश्विक बाजार के झटकों से निपटने के लिए भारत के पास कोई ठोस बैकअप प्लान नहीं था।
- लागत का 60% हिस्सा केवल तेल: एटीएफ, जो सामान्यतः एयरलाइन की परिचालन लागत का 40% होता है, अब बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। ऊपर से पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद होने के कारण उड़ानों के रास्ते लंबे हो गए हैं, जिससे ईंधन की खपत और एयरलाइंस का घाटा लगातार बढ़ रहा है।
3 साल के लिए बंधक बनी एयरलाइंस, रूट हो रहे बंद
इस योजना के तहत एयरलाइंस को अगले 36 महीनों (3 साल) के लिए केवल सरकारी ओएमसी से ही तेल खरीदने की शर्त पर बांध दिया गया है, जो प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म कर देगा। अंतरराष्ट्रीय मांग में भारी गिरावट आ चुकी है और एयरलाइंस ने कई विदेशी रूटों पर अपनी सेवाएं या तो कम कर दी हैं या हमेशा के लिए निलंबित (Suspend) कर दी हैं। ₹10,000 करोड़ का यह अस्थायी मरहम उड़ानों को रोकने और आसमान छूते किरायों से आम जनता को बचाने में कितना कारगर होगा, इस पर गंभीर संदेह है।


