खेती-किसानी

मौसम के बदलते मिजाज से निपटने के लिए अब महिला किसानों को संभालनी होगी कमान-कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही

खेती को बचाना है तो महिलाओं को बनाना होगा 'उद्यमी'; गेट्स फाउंडेशन से लेकर नाबार्ड के दिग्गजों के बीच गूंजा शाही का मंत्र!

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक आलीशान होटल में आज कृषि क्षेत्र को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। “जलवायु अनुकूलन उपायों के लिए महिला किसानों को सशक्त बनाने” के गंभीर विषय पर सजी इस महफिल में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सूबे के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने बहुत ही कड़क और दूरगामी संदेश दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वैश्विक स्तर पर जो जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का हाहाकार मचा हुआ है, उसकी चुनौतियों से निपटने के लिए अब महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी और उनका नेतृत्व समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।

अन्नदाता नहीं, अब ‘उद्यमी’ बनेंगी महिलाएं! मंत्री जी ने पिछली व्यवस्थाओं पर तंज कसते हुए और सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं का योगदान हमेशा से अतुलनीय रहा है, लेकिन अब उन्हें सिर्फ खेतों में मजदूरी करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। योगी सरकार का संकल्प महिलाओं को “अन्नदाता से उद्यमी” बनाने का है। उन्होंने कहा कि मौसम के इस अनिश्चित मिजाज और सूखे-बाढ़ के दौर में पारंपरिक खेती को बचाने के लिए महिलाओं को उन्नत तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और संसाधनों से लैस करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

दिग्गजों की मौजूदगी में खिंचा भविष्य का खाका कृषि मंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि चाहे कृषि यंत्रों पर बंपर सब्सिडी (अनुदान) देना हो, जैविक खेती को नई ऊंचाई पर ले जाना हो या फिर मोटे अनाजों (मिलेट्स) का डंका बजाना हो—हर जगह महिलाओं को आगे रखा जा रहा है। इस महा-मंथन के दौरान मंच पर प्रमुख सचिव कृषि श्री रविंद्र, गेट्स फाउंडेशन की निदेशक डॉ. अना मारिया लोबोग्रेरियो, पूर्व कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी और नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक पंकज कुमार जैसे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के मठाधीश मौजूद रहे। कुल मिलाकर कहें तो शाही जी ने साफ कर दिया है कि यूपी की कृषि नीति अब पर्यावरण-अनुकूल और पूरी तरह से वीमेन-पावर (महिला शक्ति) के भरोसे आगे बढ़ेगी!

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