लखनऊ के सूक्ष्म उद्योग बर्बादी की कगार पर, रक्षा मंत्री की चौखट पर पहुंचे बेबस उद्यमी
सरकारी उपेक्षा, कड़े बैंक नियम और 'निवेश मित्र' पोर्टल के जुल्म से टूट रही MSME की कमर; सिमटने लगा कारोबार!

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क
उत्तर प्रदेश को ‘उद्यम प्रदेश’ बनाने और उद्योगों को पंख लगाने के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत बेहद खौफनाक है। राजधानी लखनऊ के सरोजिनी नगर औद्योगिक क्षेत्र निर्माता संघ (SIMA) के महासचिव रितेश श्रीवास्तव को आज अपनी जान बचाने और डूबते कारोबार को बचाने के लिए सीधे देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह के दरबार में गुहार लगानी पड़ी। उद्यमियों ने रक्षा मंत्री को जो ज्ञापन सौंपा है, वह असल में यूपी में दम तोड़ते सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (MSME) का एक दर्दनाक सुसाइड नोट जैसा है।
सरकारी खरीद में अपनों से ही सौतेला व्यवहार! गंभीर आरोप है कि यूपी के आयुष और अन्य MSME उद्योगों को खुद उत्तर प्रदेश की सरकारी खरीद में ही लात मार दी जाती है और बाहरी कंपनियों को मलाई बांटी जा रही है। हद तो यह है कि सरकार का ‘निवेश मित्र’ पोर्टल उद्यमियों के लिए ‘शत्रु पोर्टल’ बन चुका है, जहां बिना कोई मौका दिए आवेदनों को सीधे कूड़ेदान में फेंक (निरस्त) दिया जाता है।
बैंकों का शिकंजा और बुनियादी ढांचे का कबाड़ा मुलाकात में सामने आया कि सरकारी कड़े एनपीए (NPA) मानदंडों और बैंकों की तानाशाही के कारण छोटे उद्योगों को भीख की तरह भी लोन नहीं मिल रहा है। बुनियादी ढांचे का यह हाल है कि आग से बचने के लिए भी उद्योगों पर भारी बोझ डाला जा रहा है, जिससे उनकी साख और वित्तीय स्थिति पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ गई है। सालों से लीज पर चल रही फैक्ट्रियों को फ्रीहोल्ड करने के नाम पर फाइलें दबी पड़ी हैं, और भूखंड खाली पड़े-पड़े धूल फाँक रहे हैं। रक्षा मंत्री ने हर बार की तरह केवल ‘आश्वासन का मरहम’ लगाया है, लेकिन हकीकत यह है कि अगर यह सिस्टम लूट और अफसरशाही की मनमानी नहीं रुकी, तो लखनऊ के सूक्ष्म उद्योग पूरी तरह जमींदोज हो जाएंगे।



