खेती-किसानी

रासायनिक खादों पर लगेगी 50% की लगाम

काकोरी में ICAR-CISH की बड़ी पहल

‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत सरसंडा गाँव में जुटी महिला और पुरुष किसान, बांटे गए वर्मीकम्पोस्ट बेड

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय मिशन “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत आज लखनऊ के काकोरी स्थित सरसंडा गाँव में एक महत्वपूर्ण ‘किसान गोष्ठी-सह-क्षेत्र दिवस’ का सफल आयोजन किया गया। ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर निर्भरता को कम करना और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना था। इस गोष्ठी में क्षेत्र के 76 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जिनमें 32 महिला किसानों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान और राज्य कृषि विभाग के प्रतिनिधि भी विशेष रूप से उपस्थित थे।

बायोएजेंट ‘ग्रो श्योर’ और वर्मीकम्पोस्ट से सुधरेगा मिट्टी का स्वास्थ्य

संस्थान के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन ने किसानों को संबोधित करते हुए पारंपरिक खेती में क्रांतिकारी बदलाव लाने का आह्वान किया।

  • उर्वरकों में 50% कटौती: उन्होंने गेहूँ और अन्य फसलों में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को आधा (लगभग 50 प्रतिशत) करने पर ज़ोर दिया।
  • बायोएजेंट और बेड का वितरण: किसानों को बीज उपचार के लिए प्रेरित करते हुए सब्जियों में रोगों के प्रबंधन हेतु ‘ग्रो श्योर’ और ‘ट्राइकोडर्मा’ जैसे बायोएजेंट की बोतलें और वर्मीकम्पोस्ट बेड मुफ्त वितरित किए गए।
  • अपशिष्ट प्रबंधन: डॉ. दामोदरन ने हरी खाद (green manuring), वर्मीकम्पोस्टिंग और वर्मीवॉश के जरिए कृषि अपशिष्टों के पुनर्चक्रण पर बल दिया और आम के बागों में स्थापित प्रदर्शन स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया।

सरकारी योजनाओं और अच्छी कृषि पद्धतियों (GAPs) की दी गई जानकारी

गोष्ठी के दौरान संस्थान के कटाई उपरांत प्रबंधन प्रभाग के प्रमुख डॉ. अकाथ सिंह ने गाँव में चल रहे विभिन्न तकनीकी हस्तक्षेपों का विवरण दिया, जिसमें जैविक इनपुट की तैयारी और बाज़ार-आधारित सामुदायिक प्रसंस्करण शामिल हैं। वहीं माल ब्लॉक के कृषि विकास अधिकारी (ADO) श्री सिकंदर यादव ने किसानों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं जैसे ‘किसान पंजीकरण पोर्टल’, ‘किसान सम्मान निधि KYC’, ‘सौर पंप योजना’ और ब्लॉक स्तरीय बीज भंडारों के बारे में विस्तार से जागरूक किया। इससे पूर्व डॉ. सुशील कुमार शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मिट्टी परीक्षण-आधारित खेती और फसल विविधीकरण के महत्व को रेखांकित किया। पूरे कार्यक्रम का सफल समन्वय सत्येंद्र कुशवाहा ने परियोजना कर्मचारियों के साथ मिलकर किया।

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