कागजी जमा में बढ़त के बावजूद बैंकों के पास कैश घटा, रिजर्व बैंक के डेटा ने खोली क्रेडिट और लिक्विडिटी मिसमैच की पोल!
बैंकिंग सिस्टम पर बढ़ा भारी दबाव: RBI से बैंकों का कर्ज 14 गुना उछला, नकदी संकट की आहट से सहमा बाजार!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी अनुसूचित बैंकों की ताजा वित्तीय स्थिति रिपोर्ट ने देश के बैंकिंग सेक्टर की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। आंकड़ों से साफ है कि देश के बैंकिंग सिस्टम पर नकदी (लिक्विडिटी) का संकट गहराता जा रहा है। इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) द्वारा RBI से लिया गया कर्ज (Borrowings from RBI) मई 2025 में जहां मात्र ₹6,516 करोड़ था, वह 31 मई 2026 को करीब 14 गुना बढ़कर ₹92,900 करोड़ के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। केवल पिछले दो हफ्तों (15 मई से 31 मई) में ही इसमें ₹91,900 करोड़ से ज्यादा का भारी उछाल आया है, जो यह दिखाता है कि बैंकों के पास रोजमर्रा के कामकाज के लिए कैश की भारी किल्लत है।
चिंता यहीं खत्म नहीं होती, बैंकों के खुद के पास मौजूद नकदी (Cash in Hand) में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मई 2025 में वाणिज्यिक बैंकों के पास ₹87,179.07 करोड़ का कैश था, जो 31 मई 2026 को घटकर सिर्फ ₹72,540.68 करोड़ रह गया है। इसी तरह, रिज़र्व बैंक के पास बैंकों का जमा बैलेंस (Balances with RBI) भी पिछले साल के ₹9,56,086.24 करोड़ से घटकर ₹7,93,521.42 करोड़ पर आ गया है।
इस निगेटिव ट्रेंड का मुख्य कारण लोन और डिपॉजिट के बीच बढ़ता असंतुलन (Credit-Deposit Mismatch) है। बैंक अंधाधुंध तरीके से लोन तो बांट रहे हैं, लेकिन उस रफ्तार से लोग बैंकों में पैसा जमा नहीं कर रहे हैं। हालांकि कुल जमा (Deposits) ₹26,00,2105.61 करोड़ दिख रहा है, लेकिन बैंकों का कुल कर्ज (Bank Credit) ₹21,51,5965.07 करोड़ तक खींच चुका है। इसमें से बड़ा हिस्सा लोन और ओवरड्राफ्ट का है। बैंकों की इस आक्रामक लोन नीति और घटती नकदी के कारण आने वाले दिनों में आम जनता के लिए लोन महंगा हो सकता है और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज बढ़ाने का दबाव बैंकों पर और बढ़ेगा।



