जुलाई से ग्रामीण विकास की नई व्यवस्था लागू, लेकिन राज्यों की अधूरी तैयारी और बजट के पेंच से मचेगा हड़कंप!
कागजों पर 1.25 लाख करोड़ का 'महा-आवंटन', जमीनी हकीकत में 4 राज्यों ने अब तक नहीं काटा बजट, मनरेगा मजदूरों पर मंडराया संकट!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क।
केंद्र सरकार की तरफ से ग्रामीण विकास और मनरेगा को लेकर 1 जुलाई 2026 से एक नई व्यवस्था थोपे जाने की तैयारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक उलझनों और राज्यों की अधूरी तैयारी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक तो की, लेकिन इस बैठक ने नई व्यवस्था को लेकर चल रही खींचतान को और उजागर कर दिया है।
योजना के तहत कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये (जिसमें 30,000 करोड़ रुपये पहले के मनरेगा और 95,692 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन शामिल है) देने का दावा किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह पैसा 2.80 लाख ग्राम पंचायतों को सीधा जाएगा, लेकिन सबसे बड़ा डर इस ‘ट्रांजिशन’ यानी बदलाव के दौर को लेकर है। खुद केंद्रीय मंत्री को राज्यों को चेतावनी देनी पड़ी कि इस बदलाव में एक भी मजदूर बेरोजगार नहीं होना चाहिए और मजदूरी भुगतान नहीं रुकना चाहिए, जो यह साफ संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर बड़ी गड़बड़ी की आशंका है।
चिंता की बात यह है कि देश के 4 बड़े राज्यों—झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम—ने अब तक अपने बजट में इसके लिए जरूरी वित्तीय प्रावधान ही नहीं किए हैं। खुद केंद्रीय मंत्री को इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर इसके लिए गुहार लगानी पड़ रही है। इसके अलावा, अभी तक केवल तीन राज्यों (मिजोरम, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश) ने ही राज्य स्तरीय अधिसूचना जारी की है, बाकी राज्य इस रेस में काफी पीछे हैं।
इसके ऊपर से, डिजिटल अनिवार्यताओं जैसे DBT, ई-केवाईसी (e-KYC) और फेस ऑथेंटिकेशन को 100% अनिवार्य करने का दबाव बनाया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में खराब इंटरनेट और तकनीकी समझ की कमी के कारण यह गरीब और अनपढ़ मजदूरों के लिए जी का जंजाल बन सकता है। यूपी को 9,721 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये आवंटित तो हुए हैं, लेकिन अगर 1 जुलाई तक जिला और ब्लॉक स्तर पर क्षमता निर्माण नहीं हुआ, तो यह पूरा फंड सरकारी फाइलों और बजट की उलझनों में फंसकर रह जाएगा और मजदूर काम के लिए भटकते रहेंगे।



