इलाज के आंकड़ों से आगे बढ़कर परिणामों का मूल्यांकन करें चिकित्सा संस्थान: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
SGPGI को मिला जवाबदेही का मंत्र: 'नो बेड' नहीं बनेगा इलाज से इनकार का बहाना, शोध और मरीजों के परिणाम पर होगा फोकस

एसजीपीजीआई का 30वां दीक्षांत समारोह: 279 मेधावियों को मिलीं उपाधियां, स्वास्थ्य मंत्री ने दिया ‘नो बेड’ पॉलिसी पर सख्त संदेश
[निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGIMS) के 30वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने चिकित्सा और शोध की गुणवत्ता को लेकर देश के स्वास्थ्य तंत्र के समक्ष एक दूरगामी और गंभीर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चिकित्सा संस्थानों को केवल सफल ऑपरेशनों और उपचारों के आंकड़े गिनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इलाज के बाद मरीजों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव आया है। समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, संस्थान के निदेशक डॉ. आर.के. धीमन तथा डीन प्रो. शालिनी कुमार सहित चिकित्सा जगत की कई प्रतिष्ठित विभूतियाँ उपस्थित थीं। समारोह में कुल 279 विद्यार्थियों को डिग्रियां और पदक प्रदान किए गए।

सफल सर्जरी के बाद ‘जीवन की गुणवत्ता’ का हो नियमित मूल्यांकन
राज्यपाल ने संस्थान द्वारा 300 बच्चों की सफल हार्ट सर्जरी किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि बड़ी उपलब्धि सिर्फ सर्जरी करना नहीं, बल्कि यह ट्रैक करना है कि उनमें से कितने बच्चे आज पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों को रिसर्च और इलाज के वास्तविक परिणामों (Outcome-based healthcare) का नियमित मूल्यांकन करने की सलाह दी। केंद्र सरकार द्वारा कैंसर की 70 दवाओं पर सीमा शुल्क समाप्त किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पतालों को यह ऑडिट करना चाहिए कि इन सस्ती दवाओं का वास्तविक लाभ कितने जरूरतमंद मरीजों तक पहुंच रहा है।

बुनियादी सुविधाओं में सुधार और ‘विकसित भारत’ की ओर कदम
संस्थान के बुनियादी ढांचे पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने छात्रावासों और परिसर में वाई-फाई, इंटरनेट, पुस्तकालय और पानी के रिसाव जैसी समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने एसजीपीजीआई को आगामी एक वर्ष के भीतर देश का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान बनने का लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संस्थान द्वारा आईसीएमआर (ICMR) को भेजी गई 100 से अधिक शोध परियोजनाओं की समीक्षा आगामी सितंबर-अक्टूबर में की जाएगी। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाकर हर वंचित परिवार तक इसका लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

मरीजों को ‘नो बेड’ लिखकर वापस लौटाने की प्रवृत्ति पर उपमुख्य मंत्री की रोक
समारोह को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश के चिकित्सालयों को एक बेहद कड़ा और मानवीय संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में स्थान न होने पर किसी भी मरीज को केवल “नो बेड” लिखकर वापस नहीं भेजा जा सकता। संस्थान की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह मरीज को प्राथमिक उपचार (First Aid) दे और उसे सुरक्षित रूप से किसी अन्य उचित अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करे। चिकित्सा सेवा का प्राथमिक और अंतिम उद्देश्य हर हाल में मरीज की जान बचाना होना चाहिए।

प्रो. नारायण प्रसाद को गवर्नर्स गोल्ड मेडल; अक्टूबर से शुरू होंगी नई स्वास्थ्य सेवाएं
इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में पहली बार नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. नारायण प्रसाद को प्रतिष्ठित ‘गवर्नर्स गोल्ड मेडल’ से नवाजा गया। इसके साथ ही कई मेधावी छात्र-छात्राओं को उनकी उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए पदक सौंपे गए। संस्थान के विकास पथ का ब्यौरा देते हुए निदेशक डॉ. आर.के. धीमन ने बताया कि निर्माणाधीन अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र के पहले चरण का कार्य तीव्र गति से जारी है। आगामी अक्टूबर माह से 12 विशिष्ट विभागों में बच्चों के इलाज की उन्नत सुविधाएं प्रारंभ कर दी जाएंगी, जिसमें प्रोटॉन थेरेपी, ईसीएमओ (ECMO), एडवांस न्यूरो-इंटरवेंशन और विश्वस्तरीय कैंसर उपचार जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।



