सोशल मीडिया की ‘डर्टी पॉलिटिक्स’: राजनीतिक रंजिश में बेटियों को निशाना बनाना कब बंद होगा ?
अदिति यादव के बहाने नारी सम्मान पर बड़ा सवाल; बिना सबूत अफवाहें फैलाने वालों की 'इंटरनेट अदालत' पर भड़का गुस्सा!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
आज के इस डिजिटल दौर में सोशल मीडिया जहां लोगों को जोड़ने का माध्यम बना है, वहीं यह किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने का सबसे खतरनाक हथियार भी बनता जा रहा है। इन दिनों समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर इंटरनेट पर जिस तरह की निराधार बातें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, उसने समाज की संकुचित मानसिकता को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है। बिना किसी सबूत, बिना किसी आधिकारिक पुष्टि और बिना किसी आधार के हजारों लोग राजनीतिक द्वेष में आकर इन भ्रामक पोस्ट्स को धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं।
यह बेहद चिंताजनक है कि जब किसी बेटे का नाम सुर्खियों में आता है, तो लोग उसकी उपलब्धियों और करियर की बात करते हैं। लेकिन जैसे ही किसी बेटी का नाम चर्चा में आता है, तो समाज का एक हिस्सा सबसे पहले उसके चरित्र, उसके रिश्तों और उसकी निजी ज़िंदगी पर कीचड़ उछालने लगता है। अदिति यादव ने न तो कोई विवादित बयान दिया है और न ही वह किसी विवाद में शामिल रही हैं। इसके बावजूद उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक रसूखदार राजनीतिक परिवार से आती हैं।
राजनीति में वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है। नेताओं की नीतियों और उनके फैसलों की तीखी आलोचना हो सकती है और होनी भी चाहिए। लेकिन क्या अपनी राजनीतिक खुन्नस निकालने के लिए उनकी बेटियों और परिवार की महिलाओं को बिना किसी सबूत के सोशल मीडिया की ‘कंगारू कोर्ट’ में खड़ा कर देना सही है?
नारी शक्ति और महिला सशक्तिकरण की बातें सिर्फ चुनावी मंचों और भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। असली नारी शक्ति तब दिखाई देती है, जब हम दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर महिला के सम्मान की रक्षा करें। आज समाज को यह सोचने की जरूरत है कि एक झूठी अफवाह सिर्फ एक पोस्ट या ट्वीट नहीं होती, बल्कि वह किसी की बेटी और बहन के मान-सम्मान पर सीधा प्रहार होती है।



