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एसजीबी निवेशकों को झटका: सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की शर्तों का कड़वा सच

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारत सरकार के सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम 2020-21 सीरीज-IX को लेकर नया फरमान जारी हुआ है। यह स्कीम निवेशकों के पैसे को लंबे समय के लिए लॉक करने का एक जरिया बनकर रह गई है । कहने को तो इसमें प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की अनुमति है, लेकिन इसके लिए भी सख्त नियमों का जाल बुना गया है ।

समय से पहले पैसा निकालने पर बंदिशें

सरकार की अधिसूचना (F.No.4(4)-B(W&M)/2020) के तहत, निवेशक 5 साल पूरा होने से पहले अपना ही पैसा नहीं निकाल सकते । सीरीज-IX (इश्यू तारीख: 5 जनवरी 2021) के लिए प्रीमैच्योर रिडेम्पशन की अगली तारीख 4 जुलाई 2026 तय की गई है क्योंकि 5 जुलाई को छुट्टी है। इसका मतलब है कि निवेशकों को अपनी ही गाढ़ी कमाई के लिए सरकारी तारीखों और छुट्टियों के हिसाब से इंतजार करना होगा।

मूल्य निर्धारण पर सरकारी नियंत्रण

4 जुलाई 2026 को समय से पहले रिडेम्पशन करने वाले निवेशकों के लिए कीमत ₹14,366 प्रति यूनिट तय की गई है। यह कीमत 1, 2 और 3 जुलाई 2026 के सोने के भाव के साधारण औसत पर आधारित है। बाजार के उतार-चढ़ाव और तत्काल नकदी की जरूरत के समय निवेशकों को इस तयशुदा सरकारी मूल्य पर ही निर्भर रहना होगा, जिससे उन्हें ओपन मार्केट जैसा त्वरित लाभ नहीं मिलता।

ब्याज पर टैक्स की दोहरी मार

योजना के तहत मिलने वाला 2.50% वार्षिक ब्याज न केवल बेहद मामूली है, बल्कि यह पूरी तरह से इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत टैक्स के दायरे में आता है । यानी एक तरफ महंगाई बढ़ रही है और दूसरी तरफ सरकार आपके छोटे से ब्याज मुनाफे पर भी टैक्स वसूल रही है । इसके अतिरिक्त, मैच्योरिटी से पहले किसी भी तरह के ट्रांसफर या सेकेंडरी मार्केट जटिलताओं में इंडेक्सेशन के लाभ के बावजूद कागजी प्रक्रियाएं निवेशकों को परेशान करती हैं

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