स्पेशल रिपोर्ट

कला की दुनिया में भारत का वैश्विक महा-धमाका; अकेले प्रवीण भूषण श्रीवास्तव ने 17 साल की तपस्या से खड़ी कर दी दुनिया की सबसे ऊंची पेंटिंग

334 मीटर ऊंचा अजूबा "द स्पेस लैडर"; बिना पेंसिल-इरेज़र छुए काले कैनवास पर उकेर दी ब्रह्मांड से लेकर मानव इतिहास की गाथा!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से कला, जुनून और भारत के गौरव की एक ऐसी धुआंधार और हैरतअंगेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया है. लखनऊ के विलक्षण कलाकार प्रवीण भूषण श्रीवास्तव ने अकेले अपने दम पर 17 साल की कड़ी और अथक मेहनत से दुनिया की सबसे ऊंची पेंटिंग “द स्पेस लैडर” (The Space Ladder) बनाकर एक नया वैश्विक इतिहास रच दिया है.

इस अद्भुत कलाकृति की ऊंचाई किसी बहुमंजिला इमारत या एफिल टॉवर जैसी विशालकाय संरचना के बराबर, यानी पूरे 334 मीटर है, जबकि इसकी चौड़ाई 41 सेंटीमीटर है. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में कलाकार प्रवीण भूषण ने अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा के राज खोले. उन्होंने बताया कि इस अनोखी पेंटिंग को बनाने का सफर 7 जून 2007 को शुरू हुआ था, जो अनवरत चलते हुए 22 जनवरी 2024 को जाकर पूरा हुआ.

इस पेंटिंग की सबसे रोमांचक और मसालेदार बात यह है कि इसे एक विशाल काले कैनवास पर ऑयल, इनेमल, वॉटर इनेमल और ऐक्रेलिक रंगों के इस्तेमाल से सीधे बनाया गया है. पूरे 17 साल के इस लंबे सफर में कलाकार ने कैनवास पर एक बार भी न तो पेंसिल से कोई खाका खींचा और न ही कभी इरेज़र (रबड़) का इस्तेमाल किया. यानी जो एक बार रंग से छप गया, वो सीधे इतिहास बन गया.

“द स्पेस लैडर” सिर्फ एक पेंटिंग नहीं, बल्कि कैनवास पर सिमटा हुआ पूरा ब्रह्मांड है. इसमें सौरमंडल के बाहर के रहस्यमयी ग्रह (एक्सोप्लैनेट्स), ऊर्ट क्लाउड्स, ओरियन, बाइनरी सिस्टम के साथ-साथ पृथ्वी के विकास की पूरी कहानी दर्ज है. इतना ही नहीं, कला के इस महा-ग्रंथ में दुनिया की 19 प्राचीन सभ्यताएं, मौजूदा देशों के 232 नक्शे और झंडे, सैकड़ों तरह के जीव-जंतु, पेड़-पौधे और इंसानी इतिहास के पुराने व नए आविष्कार शामिल हैं. एक अकेले भारतीय कलाकार की यह बेमिसाल उपलब्धि आज पूरी दुनिया में भारत की रचनात्मक शक्ति का लोहा मनवा रही है

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