स्पेशल रिपोर्ट

मातृ-शिशु स्वास्थ्य में उत्तर प्रदेश का बड़ा कदम

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और आयुष विश्वविद्यालय के बीच ऐतिहासिक एमओयू

साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य नीति से मातृ मृत्यु और कुपोषण पर निर्णायक प्रहार

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (एसटीसी) और महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को वैज्ञानिक, तकनीकी और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण से सुदृढ़ बनाते हुए रोकथाम योग्य मातृ मृत्यु को शून्य करने की दिशा में ठोस कदम उठाना है।

स्वास्थ्य सुधार की नई रणनीति

योजना भवन, लखनऊ में आयोजित समारोह में स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह तथा महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (वैद्य) के. राम चंद्र रेड्डी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और नीति निर्माण को साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

अनुसंधान और तकनीकी सहयोग पर विशेष जोर

समझौते के अंतर्गत विश्वविद्यालय संयुक्त अनुसंधान, स्वास्थ्य सर्वेक्षण, तकनीकी विशेषज्ञता, डेटा विश्लेषण, निगरानी एवं मूल्यांकन में सहयोग देगा। विशेष रूप से मातृ मृत्यु दर, एनीमिया, कुपोषण, नवजात जटिलताओं को कम करने और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार पर प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा।

नीति निर्माण से लेकर प्रशिक्षण तक सहयोग

इस साझेदारी के तहत Evidence-based Guidelines, Standard Operating Procedures (SOPs), Operational Manuals तथा Policy Documents तैयार किए जाएंगे। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों, आयुष चिकित्सकों, फील्ड वर्कर्स और संबंधित अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण एवं विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार हो सके।

सरकार और अकादमिक जगत का साझा प्रयास

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिकताओं की पहचान, नीतिगत मार्गदर्शन तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करेगा, जबकि विश्वविद्यालय अपने शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों के माध्यम से अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, सामुदायिक जागरूकता और मूल्यांकन में सक्रिय योगदान देगा।

तीन वर्षों की रणनीतिक साझेदारी

यह एमओयू तीन वर्षों तक प्रभावी रहेगा तथा आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। यह वित्तीय साझेदारी नहीं होगी और प्रत्येक संस्था अपने स्तर पर होने वाले व्यय का वहन करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तर प्रदेश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी कदम साबित होगी।

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