बैंकिंग प्रणाली पर गहराता संकट: खाद्य साख (Food Credit) में भारी उछाल

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा 31 जुलाई, 2026 को जारी अनुसूचित बैंकों की स्थिति रिपोर्ट से देश की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं । 15 जुलाई, 2026 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का बकाया ‘फूड क्रेडिट’ (खाद्य साख) बढ़कर ₹1,20,730.44 करोड़ पर पहुँच गया है । पिछले वर्ष (11 जुलाई, 2025) के ₹58,992.85 करोड़ की तुलना में यह 100% से अधिक का भयानक उछाल बैंकिंग परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और सरकारी खाद्यान्न खरीद के बढ़ते वित्तीय बोझ पर चिंताजनक संकेत दे रहा है ।
बैंकों की उधारी में भारी वृद्धि और लिक्विडिटी का दबाव
रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, अनुसूचित बैंकों पर कुल देनदारियाँ और वाणिज्यिक बैंकों का बैंक क्रेडिट ₹2,22,45,520.18 करोड़ के खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है । भारतीय रिज़र्व बैंक से बैंकों की उधारी और रिज़र्व बैंक के पास जमा नकदी में असंतुलन यह दर्शाता है कि बैंकिंग तंत्र प्रणालीगत जोखिम (Systemic Risk) और तरलता संकट (Liquidity Pressure) के मुहाने पर खड़ा है ।
अन्य देनदारियों में बेतहाशा बढ़ोतरी से बढ़ता वित्तीय जोखिम
जनता और अन्य संस्थानों की जमा राशि के साथ-साथ अन्य मांग एवं समय देनदारियों (Demand & Time Liabilities) में लगातार हो रहा उतार-चढ़ाव वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन रहा है । सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों द्वारा लिया जाने वाला खाद्य ऋण बैंकों के पूंजी आधार को दबा रहा है, जिससे निजी क्षेत्र में निवेश और क्रेडिट फ्लो प्रभावित होने की गंभीर आशंका पैदा हो गई है ।



