रणनीतिक मोर्चे पर रक्षा मंत्री का बड़ा फैसला: फील्ड कमांडरों की वित्तीय शक्तियां हुई दोगुनी!

₹1.25 लाख करोड़ से अधिक की खरीद को मिली रफ्तार, आत्मनिर्भरता और स्वदेशीकरण पर रहेगा विशेष जोर
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने तथा भारतीय सैन्य बलों की परिचालन क्षमता (Operational Efficiency) को अत्याधुनिक स्तर पर ले जाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने आज एक युगांतरकारी कदम उठाया है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान चिकित्सा एवं निर्माण परियोजनाओं सहित रक्षा सेवाओं के लिए वित्तीय शक्तियों के संशोधित प्रत्यायोजन (Delegation of Financial Powers) को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया। नए संशोधनों के तहत फील्ड कमांडरों की वित्तीय सीमाओं में सीधे 100 प्रतिशत (दोगुनी) तक की भारी वृद्धि की गई है, जबकि कुछ विशिष्ट मामलों में यह छूट दोगुनी से भी अधिक है। इस ऐतिहासिक फैसले से सेना के अग्रिम मोर्चे पर तैनात कमांडरों को हथियारों, रसद और आपातकालीन उपकरणों के अनुबंधों को शीघ्रता से संपन्न करने तथा रणनीतिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अभूतपूर्व गति मिलेगी।
राजस्व मार्ग से ₹1.25 लाख करोड़ की खरीद; विदेशी निर्भरता होगी खत्म
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (Atmanirbharta) को बढ़ावा देने और विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (OEMs) पर भारत की निर्भरता को न्यूनतम करने के लिए इस नीति को बेहद बारीकी से तैयार किया गया है।
- अनुसंधान एवं विकास को बल: रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए आवंटित वित्तीय शक्तियों को सीधे दोगुना कर दिया गया है।
- राजस्व मार्ग का बड़ा बजटीय सपोर्ट: वित्तीय शक्तियों के इस संशोधित प्रत्यायोजन से चालू वर्ष के बजटीय आवंटन के अनुसार अकेले राजस्व मार्ग (Revenue Route) के जरिए 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद प्रक्रिया को तीव्र गति से पूरा करने में मदद मिलेगी।
संयुक्त-सेवा खरीद के नए प्रावधान और शीर्ष कमान की उपस्थिति
सैन्य बलों की बदलती परिचालन एवं रखरखाव आवश्यकताओं को देखते हुए यह कदम आवश्यक हो गया था, क्योंकि इससे पहले इन शक्तियों को साल 2021 में अधिसूचित किया गया था। अब अक्टूबर 2025 में अधिसूचित संशोधित रक्षा खरीद नियमावली के साथ मिलकर यह नया नियम संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
संयुक्त खरीद को बढ़ावा: इस नीति के तहत, सामान्य खरीद की तुलना में उच्चतर अधिकार क्षेत्र के साथ ‘अग्रणी सेवा’ द्वारा संयुक्त सेवा खरीद (Joint-Service Procurement) को बढ़ावा देने के लिए बिल्कुल नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। साथ ही, वस्तुओं और सेवाओं की खरीद को विकेंद्रीकृत करने के लिए कई नए सक्षम वित्तीय प्राधिकरणों की स्थापना की गई है।
इस महत्वपूर्ण और गरिमामयी अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा वित्त) श्री विश्वजीत सहाय और वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल नागेश कपूर सहित रक्षा मंत्रालय के तमाम शीर्ष सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।


